नई दिल्ली | वेब वार्ता
तेलंगाना में बेजुबान जानवरों पर कथित अत्याचारों का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजधानी में गूंजने लगा है। मंगलवार को दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन के सामने जंतु अधिकार कार्यकर्ताओं का एक बड़ा समूह उग्र प्रदर्शन पर उतर आया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि तेलंगाना में हजारों आवारा कुत्तों और सौ से अधिक बंदरों की नृशंस हत्या की गई है।
तेलंगाना सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने तेलंगाना सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि यह कथित हत्याएं मानव-जंतु संघर्ष के नाम पर की जा रही हैं, जो पूरी तरह अमानवीय और गैरकानूनी हैं। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण नजर आया।
प्रशासन पर जानवरों को खत्म करने का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन समस्या के समाधान के बजाय जानवरों को खत्म करने की नीति अपना रहा है। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट रूप से आवारा जानवरों को मारने (कलिंग) पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद कथित तौर पर यह कार्रवाई की जा रही है।
“हिंसा नहीं, विज्ञान है समाधान”
कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेताया कि समस्या का समाधान हिंसा में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मानवीय उपायों में है। उन्होंने कहा कि जानवरों की हत्या न तो स्थायी समाधान है और न ही यह कानूनसम्मत है।
पशु जन्म नियंत्रण नीति लागू करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नीति का सख्ती से पालन करे। उन्होंने स्टेरिलाइजेशन (नसबंदी), वैक्सीनेशन (टीकाकरण) और हैबिटेट प्रोटेक्शन (निवास-स्थल की सुरक्षा) को ही आवारा पशुओं की समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान बताया।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि मारकर आबादी कम करना अस्थायी और क्रूर तरीका है, जबकि जन्म नियंत्रण से लंबे समय में न सिर्फ पशुओं की संख्या नियंत्रित होती है, बल्कि उनके आक्रामक व्यवहार में भी कमी आती है।
तेलंगाना सरकार पर बढ़ेगा दबाव?
अब सवाल यह है कि क्या तेलंगाना सरकार इन गंभीर आरोपों को गंभीरता से लेगी और कानून के दायरे में रहकर मानवीय समाधान अपनाएगी। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है और सरकार को देशभर में आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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