Tuesday, January 27, 2026
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन नहीं रहे, ‘दिशोम गुरू’ को देश ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

नई दिल्ली/रांची, (वेब वार्ता)। आदिवासी समाज की आवाज, पृथक झारखंड आंदोलन के अग्रदूत और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे दिशोम गुरू ने दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से समूचे झारखंड समेत देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम प्रमुख नेताओं ने शोक जताते हुए उन्हें गरीबों, आदिवासियों और वंचितों का सच्चा प्रतिनिधि बताया। श्री मोदी ने कहा, “श्री शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में तरक्की की। उनका आदिवासी समुदाय और वंचितों को सशक्त बनाने का जुनून हमेशा याद रखा जाएगा।”

सामाजिक संघर्ष से सियासी शिखर तक

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। बेहद कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े सोरेन ने कम उम्र से ही महाजनी प्रथा, शराबखोरी, और ज़मींदारी शोषण के खिलाफ जनजागरण अभियान शुरू किया। पिता की हत्या के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और मजदूरी करते हुए आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ाई शुरू की।

झारखंड मुक्ति मोर्चा और राज्य आंदोलन

1970 के दशक में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसने अलग झारखंड राज्य की मांग को जनांदोलन का रूप दिया। 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ, जिसमें शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, हालांकि बार-बार राजनीतिक अस्थिरता के चलते उन्हें जल्दी-जल्दी पद छोड़ना पड़ा।

सांसद, मंत्री और विवाद

श्री सोरेन आठ बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे। वह 2004, 2006 और 2009 में तीन बार कोयला मंत्री बने। हालांकि पुराने मुकदमों और राजनीतिक विवादों के चलते उन्हें कई बार मंत्रिपद छोड़ना पड़ा। शशिनाथ झा हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल गए, लेकिन बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया।

शोक की लहर, राज्यसभा स्थगित

शिबू सोरेन के निधन के बाद राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। उपसभापति हरिवंश ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “देश ने एक अनुभवी सांसद और आदिवासी अधिकारों के सच्चे पैरोकार को खो दिया है।” राज्यसभा में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखा, “आज मैं शून्य हो गया हूं। आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं।”

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