नई दिल्ली, न्यायिक डेस्क | वेब वार्ता
पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कार्यालय और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर हुई रेड से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को तीखा माहौल देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे न्यायालय के मुंह में शब्द न डालें।
रेड मामले में ईडी की याचिका पर सुनवाई
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कुछ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप को लेकर सीबीआई जांच की मांग की गई है। इससे पहले बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें पार्टी के पॉलिटिकल डेटा को गोपनीय रखने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचौली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह हाईकोर्ट के रवैये से परेशान हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने दलील दी कि हालिया घटनाक्रम से यह माना जाना चाहिए कि हाईकोर्ट न्याय प्रदान करने में असमर्थ है। सिब्बल की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
‘आप मेरे मुंह में शब्द नहीं डाल सकते’
सिब्बल की दलील पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा, “आप मेरे मुंह में शब्द नहीं डाल सकते। यह तय करना अदालत का काम है कि उसे क्या मानना है और क्या नहीं।” अदालत ने साफ किया कि वह किसी भी पक्ष के सुझाव के आधार पर पूर्वाग्रह नहीं बनाएगी और तथ्यों व कानून के आधार पर ही फैसला करेगी।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में समान याचिकाएं
कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई कर फैसला देना चाहिए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने एक दिन पहले यह कहते हुए सुनवाई टाल दी थी कि मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
- ईडी ने हाईकोर्ट से सुनवाई टालने की मांग की थी
- हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका का हवाला दिया
- टीएमसी की पॉलिटिकल डेटा गोपनीयता याचिका खारिज
ईडी का दावा और विवाद
हाईकोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा था कि ईडी ने अपने पंचनामे में उल्लेख किया है कि उसके पास कोई दस्तावेज नहीं है, क्योंकि रेड के दौरान कथित तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दस्तावेज अपने साथ ले गई थीं। इसी दावे को लेकर अब जांच और कानूनी बहस तेज हो गई है।
निष्कर्ष: कानूनी बहस के साथ बढ़ा सियासी तापमान
I-PAC रेड मामले ने अब केवल जांच एजेंसियों तक सीमित न रहते हुए संवैधानिक और न्यायिक विमर्श का रूप ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों से यह साफ है कि अदालत इस मामले में हर दलील को बेहद सावधानी से परखने के मूड में है। आने वाले दिनों में यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर डाल सकता है।




