नई दिल्ली, नेशनल वार्ता | वेब वार्ता
दूरदर्शन की वरिष्ठ और लोकप्रिय पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है। 80 और 90 के दशक में अपनी सौम्य आवाज, सटीक हिंदी उच्चारण और गरिमामयी प्रस्तुति से उन्होंने दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनके निधन से भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता को गहरी क्षति पहुंची है।
80-90 के दशक की पहचान थीं सरला माहेश्वरी
सरला माहेश्वरी दूरदर्शन के उस दौर की प्रमुख पहचान थीं, जब देश में 24×7 न्यूज चैनलों का प्रचलन नहीं था। उस समय दूरदर्शन ही समाचारों का सबसे विश्वसनीय माध्यम माना जाता था। उन्होंने अपनी सादगी और विश्वसनीय शैली से दर्शकों का भरोसा जीता।
करियर और व्यक्तिगत विवरण
सरला माहेश्वरी ने वर्ष 1976 में दूरदर्शन में अनाउंसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में वह समाचार वाचन से जुड़ीं और लगभग तीन दशकों तक दर्शकों की पसंदीदा एंकर बनी रहीं।
| विवरण | जानकारी | स्थिति |
|---|---|---|
| उम्र | 71 वर्ष | निधन |
| सेवा अवधि | 1976 से 2005 | दूरदर्शन |
| कार्यकाल | लगभग 29 वर्ष | पूर्ण |
| अंतिम संस्कार | 12 फरवरी, शाम 4 बजे | निगम बोध घाट, दिल्ली |
- 1976 में दूरदर्शन से करियर की शुरुआत।
- 2005 तक सक्रिय रूप से सेवा दी।
- सटीक उच्चारण और सौम्य शैली के लिए प्रसिद्ध।
डीडी न्यूज और दर्शकों की श्रद्धांजलि
दूरदर्शन परिवार की ओर से श्रीमती सरला माहेश्वरी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। वह दूरदर्शन की सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका थीं, जिन्होंने अपनी सौम्य आवाज़, सटीक उच्चारण और गरिमापूर्ण प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में विशेष स्थान बनाया। उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों… pic.twitter.com/Hx8glZI7rk
— Doordarshan National दूरदर्शन नेशनल (@DDNational) February 12, 2026
डीडी न्यूज ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर सरला माहेश्वरी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। चैनल की ओर से कहा गया कि उन्होंने अपनी सादगी, संयम और गरिमापूर्ण प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में विशेष स्थान बनाया। सोशल मीडिया पर भी सहकर्मी और दर्शक लगातार श्रद्धांजलि संदेश साझा कर रहे हैं।
टेलीविजन के बदलावों की साक्षी रहीं
सरला माहेश्वरी ने ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविजन से लेकर रंगीन प्रसारण और आधुनिक समाचार प्रस्तुति तक के बदलावों को नजदीक से देखा। दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने ऑडिशन देकर दूरदर्शन में प्रवेश किया था।
निष्कर्ष
सरला माहेश्वरी का निधन भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत के समान है। उनकी सौम्यता, निष्पक्षता और भाषा पर पकड़ आने वाली पीढ़ियों के पत्रकारों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
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