Sansad March Live :
नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। राजधानी की सड़कों पर सोमवार को एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का नज़ारा देखने को मिला। विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ संसद भवन से लेकर निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक संसद मार्च का ऐलान किया। लेकिन मार्च शुरू होते ही दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच इस काफिले को रोक दिया और राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खडके, प्रियंका गांधी वाड्रा, महुआ मोइत्रा, सागरिका घोष, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
आज जब हम चुनाव आयोग से मिलने जा रहे थे, INDIA गठबंधन के सभी सांसदों को रोका गया और हिरासत में ले लिया गया।
वोट चोरी की सच्चाई अब देश के सामने है।
यह लड़ाई राजनीतिक नहीं – यह लोकतंत्र, संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के अधिकार की रक्षा की लड़ाई है।
एकजुट विपक्ष और देश का हर… pic.twitter.com/SutmUirCP8
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 11, 2025
मार्च की शुरुआत और नारेबाज़ी
मार्च में शामिल सभी सांसद सफेद टोपी पहने हुए थे, जिन पर बड़े अक्षरों में ‘SIR’ और ‘वोट चोरी’ लिखा था और उन पर लाल क्रॉस का निशान बना था। यह प्रतीक सरकार पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदाता सूची में हेरफेर के गंभीर आरोप को दर्शा रहा था।
सांसदों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर “एक व्यक्ति, एक वोट”, “लोकतंत्र बचाओ” और “SIR वापस लो” जैसे नारे लिखे थे।
राहुल गांधी: “यह संविधान बचाने की लड़ाई है”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पुलिस हिरासत में जाने से पहले कहा —
“यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, यह संविधान बचाने की लड़ाई है। हम एक साफ और पारदर्शी मतदाता सूची चाहते हैं, जिसमें किसी नागरिक का नाम ग़लत तरीके से जोड़ा या हटाया न जाए। यह लड़ाई एक व्यक्ति, एक वोट की है।”
प्रियंका गांधी वाड्रा: “सरकार डरपोक है”
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा —
“जो सरकार अपने ही निर्वाचित सांसदों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने से रोक दे, वह कायर है। यह डर का संकेत है, ताकत का नहीं।”
अखिलेश यादव का ‘एक्शन मोड’
सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तो पुलिस की बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़ गए। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
अखिलेश ने कहा —
“लोकतंत्र में जनता की आवाज़ दबाना सबसे बड़ा अपराध है। हम SIR के ज़रिये हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ खड़े रहेंगे।”
भारी सुरक्षा इंतज़ाम
दिल्ली पुलिस ने इस मार्च के मद्देनज़र सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतज़ाम किए थे —
7500 से अधिक सुरक्षा बल की तैनाती
संसद से लेकर चुनाव आयोग तक 800 हाई-डेफ़िनिशन सीसीटीवी कैमरे
एंटी-ड्रोन सिस्टम, रूफटॉप स्नाइपर्स और स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट्स
NSG, SPG, अर्धसैनिक बल और दिल्ली पुलिस की संयुक्त तैनाती
मेडिकल और फायर सर्विस की तैयारियां
SIR और ‘वोट चोरी’ का विवाद क्या है?
‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़े जाते हैं और पुराने हटाए जाते हैं। विपक्ष का आरोप है कि बिहार सहित कई राज्यों में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा है — यानी विपक्षी वोटरों के नाम हटाना और फर्जी नाम जोड़ना।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इंकार किया है, लेकिन विपक्ष SIR को तुरंत रद्द करने की मांग पर अडिग है।
राजनीतिक माहौल गरम
यह मार्च ऐसे समय में हुआ है जब 2024 के लोकसभा चुनावों में अब सिर्फ कुछ महीने बचे हैं। विपक्ष का मानना है कि मतदाता सूची में किसी भी गड़बड़ी का सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ेगा, और यही वजह है कि वे इसे लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला मान रहे हैं।
संसद मार्च सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी मौसम की राजनीतिक गर्मी का इशारा भी है। विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा का अभियान बता रहा है, जबकि सरकार और चुनाव आयोग इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गर्म रहने वाला है।
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