नई दिल्ली | वेब वार्ता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय और यूरोपीय रक्षा उद्योगों को वैश्विक हित में मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सहयोग न केवल भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के दृष्टिकोण को मजबूती देगा, बल्कि यूरोपीय संघ की रणनीतिक स्वायत्तता की आकांक्षा के भी अनुरूप है। यह बात उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली में यूरोपीय आयोग की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष सुश्री काजा कल्लास के साथ हुई बैठक के दौरान कही।
रक्षा सहयोग को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इनमें विश्वसनीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण, भविष्य के लिए तैयार सैन्य क्षमताओं और आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं, जो दोनों के मजबूत होते रणनीतिक संबंधों की आधारशिला हैं।
आत्मनिर्भर भारत और यूरोपीय रणनीतिक स्वायत्तता
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय और यूरोपीय रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल से दोनों पक्षों को समान लाभ होगा। भारत जहां आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं यूरोपीय संघ भी अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आपूर्तिकर्ताओं में विविधता और बाहरी निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं का एकीकरण इस सहयोग को एक गुणक प्रभाव प्रदान करेगा।
यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म’ पहल में भारत की भूमिका
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा उद्योग यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म’ (ReArm) पहल में सार्थक भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ तेजी से अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने और पारंपरिक निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक अवसर बताया।
भारत-ईयू रक्षा सहयोग के प्रमुख बिंदु
| क्षेत्र | चर्चा का फोकस |
|---|---|
| रक्षा उद्योग | संयुक्त उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण |
| रणनीतिक दृष्टि | आत्मनिर्भर भारत और ईयू की रणनीतिक स्वायत्तता |
| समुद्री सुरक्षा | हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग |
| सैन्य अभ्यास | संयुक्त अभ्यास और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान |
हिंद महासागर क्षेत्र पर विशेष जोर
बैठक में सुश्री काजा कल्लास ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीखने पर जोर दिया। उन्होंने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा बनने और कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में यूरोपीय संघ की उपस्थिति को लेकर आभार भी व्यक्त किया।
आईएफसी-आईओआर में ईयू संपर्क अधिकारी का स्वागत
रक्षा मंत्री ने गुरुग्राम स्थित भारतीय नौसेना के सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) में यूरोपीय संघ के एक संपर्क अधिकारी की तैनाती के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे समुद्री डकैती रोधी अभियानों और हिंद महासागर क्षेत्र में उभरते खतरों के आकलन के लिए भारतीय नौसेना के साथ परिचालन समन्वय को मजबूती मिलेगी।
सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि नई दिल्ली में सुश्री काजा कल्लास से मुलाकात कर उन्हें प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने की व्यापक संभावनाएं हैं।
निष्कर्ष
भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा सहयोग पर हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत दोनों पक्षों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देती है। आत्मनिर्भर भारत की रक्षा नीति और यूरोपीय संघ की रणनीतिक स्वायत्तता की सोच के बीच तालमेल भविष्य में वैश्विक सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में नए अवसर खोल सकता है।
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