Thursday, February 12, 2026
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पाक गोलाबारी में माता-पिता को खोने वाले 22 बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएंगे राहुल गांधी

राजौरी/जम्मू, (वेब वार्ता)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी के दौरान अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो चुके 22 बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएंगे। पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने विधानसभा चुनाव में अपने गठबंधन सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के साथ किसी भी तरह के मतभेद होने की बात से इंकार किया है, लेकिन यह भी कहा कि उनकी पार्टी पिछले नौ महीनों से सत्तारूढ़ दल के साथ समन्वय समिति के गठन का इंतजार कर रही है।

राजौरी के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे कर्रा ने सोमवार देर रात संवाददाताओं को बताया, ”पुंछ और राजौरी में (सात से 10 मई के बीच) पाकिस्तानी की ओर से हुई गोलाबारी में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। इन हमलों के बाद राहुल गांधी ने पुंछ का दौरा किया था और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने हमसे कहा कि स्कूल के ऐसे बच्चों की सूची तैयार करें, जिन्होंने अपने एक या दोनों माता-पिता, खासकर परिवार के कमाने वाले सदस्य को खो दिया है। इसके अनुसार हमने उनके पास सूची जमा कर दी।”

कर्रा ने कहा कि पार्टी के पास सिर्फ पुंछ जिले में ऐसे 22 बच्चों की सूची है तथा मेरी तीन दिवसीय यात्रा के अंत में इस सूची में ऐसे और बच्चों को शामिल किया जा सकता है। भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए संघर्ष के दौरान पड़ोसी देश की ओर से की गई गोलाबारी और ड्रोन हमलों में जम्मू-कश्मीर के 28 लोगों की जान गई थी, जिनमें सिर्फ पुंछ जिले में 13 व्यक्तियों की मौत हुई थी।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बल ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीमा पार आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष हुआ था। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें अधिकतर पर्यटक थे। कर्रा ने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रभावित बच्चों की शिक्षा के लिए भेजी गई वित्तीय सहायता सौंपने के लिए मंगलवार को पुंछ के दौरे पर हैं। उन्होंने कहा, ”यह पहल बच्चों की मदद के लिए है ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।”

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