तिरुवनंतपुरम, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
आर. श्रीलेखा पॉक्सो मामला में केरल की पूर्व पुलिस महानिदेशक आर. श्रीलेखा के खिलाफ यौन उत्पीड़न से पीड़ित बच्चों की पहचान कथित रूप से उजागर करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, उनके यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित वीडियो में संवेदनशील मामलों से जुड़े पीड़ितों, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं, के नाम और व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक किए गए। अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आर. श्रीलेखा पॉक्सो मामला ने राज्य में कानूनी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।
आर. श्रीलेखा पॉक्सो मामला: शिकायत और अदालत का निर्देश
यह कार्रवाई नागरिक अधिकार कार्यकर्ता आर. जयचंद्रन की शिकायत पर शुरू हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पूर्व महिला पुलिस प्रमुख ने ऑनलाइन चर्चा के दौरान पीड़ितों की पहचान संबंधी जानकारी साझा की, जो मौजूदा कानूनों का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कथित रूप से कार्रवाई न होने पर तिरुवनंतपुरम न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट न्यायालय का रुख किया।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद तिरुवनंतपुरम संग्रहालय पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 72 के तहत मामला दर्ज किया।
किन मामलों का उल्लेख
शिकायत में कहा गया है कि वीडियो में किलीरूर, कवियूर और पेरुम्बावूर से जुड़े संवेदनशील मामलों के पीड़ितों का जिक्र किया गया। ये मामले अतीत में व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे थे। याचिकाकर्ता का तर्क है कि विशेषकर नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करना कानूनन दंडनीय है।
| कानूनी प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| पॉक्सो अधिनियम | बाल यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर प्रतिबंध |
| बीएनएस धारा 72 | पीड़ित की पहचान के गैरकानूनी खुलासे से संबंधित प्रावधान |
कानूनी स्थिति और आगे की कार्रवाई
आर. श्रीलेखा पॉक्सो मामला में अब पुलिस जांच जारी है। पॉक्सो अधिनियम के तहत किसी भी माध्यम, चाहे वह डिजिटल प्लेटफॉर्म हो या सोशल मीडिया, पर बाल पीड़ित की पहचान उजागर करना सख्त रूप से प्रतिबंधित है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद जांच एजेंसियां वीडियो सामग्री और संबंधित साक्ष्यों की समीक्षा कर रही हैं।
पूर्व डीजीपी आर. श्रीलेखा, जो राज्य की शीर्ष पुलिस अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं और वट्टियूरकावु से भाजपा वार्ड सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। आर. श्रीलेखा पॉक्सो मामला आने वाले दिनों में कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के चलते चर्चा में बना रह सकता है।
ये भी पढ़ें: जेएनयू प्रदर्शन मामला : पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी 14 प्रदर्शनकारी छात्रों को दी जमानत







