नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वदेशी प्रचंड उड़ान के साथ शुक्रवार को भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में विशेष सॉर्टी की। भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति 2026’ के दौरान की गई यह उड़ान न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी, बल्कि सशस्त्र बलों के मनोबल को भी सुदृढ़ करने वाली रही। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वदेशी प्रचंड उड़ान को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वदेशी प्रचंड उड़ान: जैसलमेर से ऐतिहासिक सॉर्टी
आज राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपना अनुभव साझा किया: ‘प्रचंड हेलिकॉप्टर आत्मनिर्भरता का एक प्रबल प्रतीक है। इस समय मैं प्रसिद्ध जैसलमेर किले के ऊपर उड़ान भर रही हूँ। मुझे देश के वीर वायु… pic.twitter.com/cgflLWRjtf
— President of India (@rashtrapatibhvn) February 27, 2026
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार, 27 फरवरी को जैसलमेर पहुंचीं, जहां उन्होंने भारतीय वायुसेना के व्यापक युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति 2026’ का अवलोकन किया। इसी दौरान उन्होंने स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी। फ्लाइंग हेलमेट और विशेष फ्लाइट ड्रेस में राष्ट्रपति की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप दिया।
यह उड़ान दो ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों के फॉर्मेशन में संपन्न हुई। दूसरे हेलीकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सवार रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वदेशी प्रचंड उड़ान के दौरान वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी भी मौजूद रहे।
‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर की विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| निर्माण | स्वदेशी हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर |
| क्षमता | उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन |
| उद्देश्य | कठिन युद्ध परिस्थितियों में मारक कार्रवाई |
| भूमिका | आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस |
‘प्रचंड’ को विशेष रूप से दुर्गम और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रभावी संचालन के लिए तैयार किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वदेशी प्रचंड उड़ान देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता का सशक्त संदेश है।
पहले भी कर चुकी हैं ऐतिहासिक सैन्य यात्राएं
राष्ट्रपति इससे पहले भारतीय नौसेना की स्वदेशी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर भी सवार हो चुकी हैं। कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से शुरू हुई उस यात्रा के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी उनके साथ थे।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ने वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल और सुखोई-30 एमकेआई में भी उड़ान भरकर सैन्य क्षमताओं का अनुभव किया है।
- 8 अप्रैल 2023: तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान
- अक्टूबर 2024: अंबाला एयरबेस से राफेल में सॉर्टी
- दिसंबर: आईएनएस वाघशीर पनडुब्बी पर ऐतिहासिक यात्रा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वदेशी प्रचंड उड़ान भारतीय सेनाओं की आधुनिकता, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में निरंतर प्रगति का स्पष्ट संकेत है। जैसलमेर में आयोजित इस सॉर्टी के माध्यम से राष्ट्रपति ने भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और वायुशक्ति को सैल्यूट किया।
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