लखनऊ/प्रयागराज, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
प्रयागराज की रेप एंड POCSO स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। 23 फरवरी 2026 को कोर्ट के निर्देश पर झूंसी थाना पुलिस ने उनके और तीन अज्ञात शिष्यों के खिलाफ POCSO एक्ट सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब मामले में पूछताछ और आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
यह मामला नाबालिगों से कथित यौन शोषण से जुड़ा है, जिसे लेकर अदालत ने गंभीर रुख अपनाते हुए पुलिस को तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश दिए।
कोर्ट आदेश की पृष्ठभूमि
मामले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने धारा 173(4) के तहत अदालत में अर्जी दाखिल की थी।
- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पर यौन शोषण का आरोप
- 13 फरवरी को नाबालिगों के बयान की वीडियोग्राफी
- सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
- 21 फरवरी को FIR के आदेश जारी
FIR में दर्ज प्रमुख धाराएं
| कानूनी प्रावधान | धारा | प्रकृति |
|---|---|---|
| भारतीय न्याय संहिता | 351(3) | गंभीर आपराधिक मामला |
| POCSO एक्ट | विभिन्न धाराएं | बाल यौन अपराध |
| अन्य प्रावधान | लागू | जांचाधीन |
कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।
पुलिस की कार्रवाई तेज
एफआईआर दर्ज होने के बाद झूंसी पुलिस टीम वाराणसी रवाना होने की तैयारी कर रही है, ताकि आरोपियों से पूछताछ की जा सके और साक्ष्य जुटाए जा सकें।
एसीपी झूंसी विमल किशोर मिश्रा ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि वे पुलिस जांच में सहयोग करेंगे।
साथ ही उन्होंने अपनी एफआईआर को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही है।
मामले पर बढ़ी सियासी और सामाजिक हलचल
इस प्रकरण के सामने आने के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशासन मामले को संवेदनशील मानते हुए पूरी सतर्कता बरत रहा है।
- नाबालिगों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
- निष्पक्ष जांच की मांग
- कानूनी प्रक्रिया पर निगरानी
- अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार
निष्कर्ष
POCSO कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज एफआईआर ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और सच्चाई कब सामने आती है।
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