नई दिल्ली, संसद डेस्क | वेब वार्ता
पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (24 मार्च) को राज्यसभा में बयान देते हुए कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य फोकस देश में तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है, ताकि आम जनता और किसानों पर इसका असर न पड़े। सरकार ने हालात की निगरानी और त्वरित निर्णय के लिए एक मंत्री समूह (GoM) का गठन भी किया है।
राज्यसभा में पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय स्तर पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि भारत में जरूरी संसाधनों की कमी न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और उर्वरकों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार की रणनीति और कदम
| मुद्दा | सरकारी कदम |
|---|---|
| तेल और गैस आपूर्ति | खाड़ी देशों से निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने के प्रयास |
| उर्वरक आपूर्ति | किसानों पर असर न पड़े, इसके लिए विशेष प्रबंधन |
| स्थिति की निगरानी | मंत्री समूह (GoM) का गठन |
| भारतीयों की सुरक्षा | विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा की समीक्षा |
उच्च स्तरीय बैठक और सर्वदलीय चर्चा
मंगलवार को संसद भवन में मंत्री समूह की उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और स्वास्थ्य एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों से तेल और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की समीक्षा करना रहा। सरकार ने इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने के लिए बुधवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।
- GoM की बैठक में शीर्ष मंत्रियों की भागीदारी
- खाड़ी देशों से सप्लाई चेन पर विशेष फोकस
- भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की समीक्षा
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का रुख
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाने का है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे केवल आलोचना कर रहे हैं। वहीं CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगने का अवसर नहीं दिया गया।
लोकसभा में भी दिया था बयान
इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने बताया कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है, जिससे आपूर्ति में किसी भी संकट से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदम मौजूदा परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियां पैदा की हैं। भारत सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और सक्रिय नजर आ रही है। हालांकि, विपक्ष की ओर से पारदर्शिता और चर्चा की मांग भी जारी है, जिससे यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद में और गरमा सकता है।
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