Tuesday, January 27, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शोक में: BBC के दिग्गज पत्रकार जिनका भारत से था गहरा नाता

नई दिल्ली | वेब वार्ता

PM Modi mourns Sir Mark Tully: भारत और भारतीय समाज को दुनिया के सामने संवेदनशील, संतुलित और गहराई से प्रस्तुत करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टली का शनिवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें पत्रकारिता की “प्रभावशाली और विश्वसनीय आवाज़” बताया। दशकों तक बीबीसी के माध्यम से भारत की राजनीति, समाज और संस्कृति को समझाने वाले सर मार्क टली का जाना न केवल पत्रकारिता जगत, बल्कि भारत के बौद्धिक संसार के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा—

“सर मार्क टली के निधन से गहरा दुख हुआ। वह पत्रकारिता की एक मजबूत और भरोसेमंद आवाज़ थे। भारत और इसके लोगों से उनका गहरा जुड़ाव उनके लेखन और रिपोर्टिंग में झलकता था। उनके विचार और विश्लेषण सार्वजनिक विमर्श में हमेशा जीवित रहेंगे।”

कौन थे सर मार्क टली: एक ब्रिटिश पत्रकार, जिसने भारत को बनाया अपना घर

ब्रिटेन में जन्मे मार्क टली वर्ष 1965 में बीबीसी संवाददाता के रूप में भारत आए। यह यात्रा केवल एक पेशेवर नियुक्ति नहीं थी, बल्कि यहीं से उनका भारत के साथ आजीवन रिश्ता शुरू हुआ। अगले लगभग तीन दशकों तक उन्होंने भारत को न केवल रिपोर्ट किया, बल्कि उसे समझा, जिया और दुनिया के सामने उसकी जटिलताओं को ईमानदारी से रखा।

उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया और कुल मिलाकर 30 वर्षों से अधिक समय तक बीबीसी से जुड़े रहे। जुलाई 1994 में उन्होंने औपचारिक रूप से बीबीसी से इस्तीफा दिया, लेकिन भारत से उनका रिश्ता कभी समाप्त नहीं हुआ।

रेडियो की सबसे भरोसेमंद आवाज़

टेलीविज़न और डिजिटल मीडिया के दौर से पहले, जब रेडियो ही सूचना का सबसे सशक्त माध्यम था, तब सर मार्क टली की आवाज़ भारत में विश्वसनीय समाचार की पहचान बन चुकी थी। राजनीतिक संकट हों, चुनावी हलचल या सामाजिक उथल-पुथल—उनकी रिपोर्टिंग संतुलन, संवेदना और तथ्यपरक विश्लेषण का उदाहरण मानी जाती थी।

यूनेस्को कूरियर ने उन्हें उस दौर का “जीवंत साक्षी” कहा, जब रेडियो जनसंचार का सबसे प्रभावी माध्यम हुआ करता था। 25 वर्षों से अधिक समय तक उनकी आवाज़ भारतीय श्रोताओं के लिए भरोसे का पर्याय बनी रही।

लेखक के रूप में भारत की आत्मा को समझने का प्रयास

पत्रकारिता के साथ-साथ सर मार्क टली एक प्रख्यात लेखक भी थे। उनकी पुस्तकें भारत की सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक जटिलताओं को गहराई से समझने का अवसर देती हैं।

  • No Full Stops in India (1991)
  • The Heart of India (1995)
  • India’s Unending Journey (2007)

इन पुस्तकों में विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश और वाराणसी के प्रति उनका लगाव स्पष्ट दिखता है, जिसे वे भारत का “सबसे काव्यात्मक हिस्सा” कहते थे। उनके लेखन में भारत एक राष्ट्र से अधिक, एक जीवंत सभ्यता के रूप में सामने आता है।

भारत से भावनात्मक और बौद्धिक रिश्ता

ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद सर मार्क टली ने भारत को अपना स्थायी निवास बनाया। बीबीसी से अलग होने के बाद भी वे भारत में ही रहे, लेखन करते रहे, व्याख्यान देते रहे और सार्वजनिक विमर्श में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे।

वे न तो अंधे प्रशंसक थे और न ही दूर से आलोचना करने वाले पर्यवेक्षक। उनकी आलोचना भी हमेशा सरोकार और जिम्मेदारी से भरी होती थी, जो उन्हें एक ईमानदार मित्र के रूप में स्थापित करती है।

पत्रकारिता के लिए अमिट विरासत

सर मार्क टली का निधन पत्रकारिता, साहित्य और सार्वजनिक विमर्श के लिए एक युगांतकारी क्षण है। उन्होंने यह सिखाया कि पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को समझने और समझाने की नैतिक जिम्मेदारी भी है।

उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के पत्रकारों को यह याद दिलाती रहेगी कि सच, संवेदना और धैर्य ही पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी है।

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