नई दिल्ली | वेब वार्ता
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने 88 घंटे तक ऐसी हवाई श्रेष्ठता कायम की कि पाकिस्तान को घुटनों पर आकर युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी। यह दावा किसी भारतीय स्रोत ने नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र यूरोपीय सैन्य विश्लेषण रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने न केवल अपने सैन्य और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि दुश्मन की सैन्य क्षमताओं पर निर्णायक वार करते हुए पूरे संघर्ष की दिशा और स्तर खुद तय किया।
स्विट्ज़रलैंड की सैन्य रिपोर्ट में बड़ा दावा
‘ऑपरेशन सिंदूर: द इंडिया–पाकिस्तान एयर वॉर (7–10 मई 2025)’ शीर्षक से प्रकाशित यह रिपोर्ट स्विट्ज़रलैंड के पुली स्थित स्वतंत्र सैन्य अध्ययन संस्थान Centre d’Histoire et de Prospective Militaires (CHPM) द्वारा जारी की गई है। रिपोर्ट के लेखक एड्रियन फोंटानेलाज़ हैं। 1969 में स्थापित CHPM किसी सरकार से संबद्ध नहीं है और सैन्य ‘लेसन्स-लर्न्ड’ व फोर्स-प्रिपरेशन विश्लेषण के लिए एक तटस्थ मंच के रूप में जाना जाता है।
पहलगाम हमले के बाद बदली भारत की रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया पूर्व के संकट प्रबंधन पैटर्न से पूरी तरह अलग थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजनीतिक नेतृत्व ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के ढांचों पर पाकिस्तान के भीतर गहरे प्रहार की अनुमति दी, जबकि सशस्त्र बलों को एस्केलेशन को नियंत्रित करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई।
7–9 मई: पाकिस्तानी डिफेंस सिस्टम पर निर्णायक वार
7–8 मई की रात पाकिस्तान की पहली लहर के हमलों के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पहले से तय दूसरे चरण की कार्रवाई शुरू की। 8 मई को भारतीय वायुसेना ने सीमा निगरानी रडारों और लंबी दूरी की सतह-से-हवा मिसाइल (SAM) बैटरियों को निशाना बनाते हुए एयर इंटरडिक्शन और एयर स्ट्राइक अभियान छेड़ा, जो 9 मई की शाम तक चला।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 8 मई को आठ और 9 मई को चार पाकिस्तानी एयरफोर्स बेस पर हमले किए गए। चुनियन और पसूर में कम से कम दो अर्ली-वॉर्निंग रडारों के निष्क्रिय होने के स्पष्ट संकेत मिले।
S-400 ने बदला खेल, Erieye तबाह
रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के पास घात लगाकर तैनात भारतीय वायुसेना की एक S-400 एयर डिफेंस बैटरी ने पाकिस्तानी वायुसेना को पूरी तरह चौंका दिया। लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर उड़ रहे Erieye या इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान को मार गिराने का दावा किया गया है। इन हमलों के बाद पाकिस्तानी डिफेंस सिस्टम लगभग ठप हो गया और जो रडार बचे, उन्हें भी हमलों से बचाने के लिए बंद कर दिया गया।
10 मई: ब्रह्मोस, SCALP और रैम्पेज से गहरे प्रहार
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 9 मई की शाम होने वाले पाकिस्तानी हमले को पहले ही भांप लिया था। इसके बाद 10 मई को रात 2:00 से 5:00 बजे के बीच भारतीय वायुसेना ने भारतीय हवाई क्षेत्र से ही Su-30MKI, राफेल और जैगुआर विमानों के जरिए ब्रह्मोस, SCALP-EG और रैम्पेज मिसाइलें दागीं।
इन हमलों में पाकिस्तान के भीतर लगभग 200 किलोमीटर तक सात ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें एक SAM बैटरी और पांच एयर बेस शामिल थे। इस्लामाबाद के पास नूर खान एयर बेस पर मिसाइल हमले से पाकिस्तानी वायुसेना का कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर नष्ट होने का दावा किया गया।
कई पाकिस्तानी एयरबेस निष्क्रिय
रिपोर्ट के अनुसार, मुरीदके एयर बेस — जो पाकिस्तान के MALE ड्रोन बेड़े का केंद्र है — वहां ड्रोन हैंगर और कंट्रोल सेंटर प्रभावित हुए। रहीम यार खान एयर बेस की रनवे पर हमले से बड़ा गड्ढा बन गया। 10 मई सुबह 10:00 बजे किए गए दूसरे हमले में सरगोधा एयर बेस के रनवे को भी निष्क्रिय कर दिया गया।
पाकिस्तान को सीजफायर की गुहार क्यों लगानी पड़ी
भारतीय वायुसेना के आकलन के अनुसार, जमीन पर कम से कम 4–5 F-16 फाइटर जेट, एक Erieye, एक C-130 विमान, कई MALE ड्रोन, दो रडार, दो कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और एक SAM बैटरी नष्ट हुईं। इन ताबड़तोड़ हमलों से पाकिस्तान की सैन्य कमर टूट गई और 10 मई दोपहर तक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों को भारत से युद्धविराम का अनुरोध करना पड़ा।
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