Monday, January 26, 2026
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मायावती ने उठाई संसद व विधानमंडलों की घटती उपयोगिता पर चिंता, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मदरसा फैसले का स्वागत

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश की संसद और राज्य विधानमंडलों की घटती उपयोगिता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सत्रों की अवधि कम होने और बार-बार हंगामे के कारण इन संस्थाओं की जन-उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। साथ ही उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें मदरसों को बिना सरकारी मान्यता के बंद करने की कार्रवाई को अनुचित बताया गया है।

संसद और विधानमंडलों के सत्रों में हंगामे पर चिंता

मायावती ने सोमवार को अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर कहा कि देश में संसद व विधानमंडलों के सत्रों के समय में लगातार कमी आ रही है। इसके साथ ही हर बार भारी हंगामे और स्थगन जैसी स्थितियों से इन संस्थाओं की जन-उपयोगिता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों को आत्ममंथन कर ठोस कदम उठाने चाहिए।

मायावती ने कहा कि लखनऊ में चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इस विषय पर चर्चा और चिंता जताई जाना एक सकारात्मक पहल है। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन तक नियमित रूप से चलनी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो सके।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मदरसा फैसले का किया स्वागत

अपने ट्वीट के दूसरे हिस्से में मायावती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें कहा गया है कि “सरकारी मान्यता नहीं होना किसी मदरसे को बंद करने का आधार नहीं हो सकता।” उन्होंने अदालत के इस निर्णय को अति-महत्वपूर्ण और सामयिक बताते हुए कहा कि अदालत ने श्रावस्ती में सील किए गए मदरसों को 24 घंटे के भीतर खोलने का जो निर्देश दिया है, वह न्यायसंगत है।

प्रशासनिक मनमानी पर भी साधा निशाना

मायावती ने कहा कि सरकार की नीतिगत रूप से प्राइवेट मदरसों के खिलाफ कोई नीति नहीं है, लेकिन जिला प्रशासनिक स्तर पर मनमानी के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों पर उचित संज्ञान लेकर अधिकारियों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगाई जाए ताकि किसी समुदाय में अनावश्यक असंतोष न फैले।

  • मायावती ने संसद और विधानमंडलों की घटती उपयोगिता पर चिंता जताई।
  • हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया – “मदरसे बंद करने का आधार मान्यता न होना नहीं हो सकता।”
  • सरकार से जिला स्तर की मनमानी रोकने की मांग की।

उन्होंने कहा कि संसद और विधानमंडल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। इसलिए इन संस्थाओं की कार्यवाही में अनुशासन और सार्थकता दोनों बनाए रखना जरूरी है। वहीं, प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता और निष्पक्षता का पालन होना भी उतना ही आवश्यक है।

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