नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
लोकसभा में आज एक महत्वपूर्ण संसदीय घटनाक्रम देखने को मिला जब Lok Sabha Speaker Removal Motion के तहत विपक्ष द्वारा लाया गया लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। सदन में इस मुद्दे पर लंबी बहस हुई जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। चर्चा के बाद सदन ने ध्वनि मत से प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके साथ ही यह Lok Sabha Speaker Removal Motion औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।
इस बहस के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका, संसदीय परंपराओं और विपक्ष के अधिकारों को लेकर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष के इस कदम की आलोचना की, जबकि विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
- लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का विपक्ष का प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज
- गृह मंत्री अमित शाह ने प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया
- सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस
- प्रस्ताव खारिज होने के बाद सदन दिन भर के लिए स्थगित
Lok Sabha Speaker Removal Motion पर सरकार का रुख
सदन में चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशक बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है, जो संसदीय राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि पूरे सदन के संरक्षक होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और एनडीए ने अपने राजनीतिक इतिहास में कभी भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया, क्योंकि वे अध्यक्ष की निष्पक्षता और गरिमा का सम्मान करते हैं। Lok Sabha Speaker Removal Motion पर बोलते हुए उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया।
रवि शंकर प्रसाद का विपक्ष पर हमला
भाजपा के वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव कुछ विपक्षी नेताओं के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए लाया गया है।
उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेश में बोलते समय उन्हें अपने शब्दों के प्रति सावधान रहना चाहिए। प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत के संविधान, संसद और निर्वाचन आयोग के खिलाफ टिप्पणी करते हैं। उन्होंने कहा कि Lok Sabha Speaker Removal Motion संसदीय इतिहास में दुर्लभ घटनाओं में से एक है और पिछले 72 वर्षों में इस पर केवल दो बार बहस हुई है।
विपक्ष ने उठाए निष्पक्षता के सवाल
सदन में विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं भी रखीं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कई बार सदन में बोलने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि संसद किसी एक दल की नहीं बल्कि पूरे देश की संस्था है और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह प्रस्ताव लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष का कोई सदस्य बोलने के लिए खड़ा होता है तो उसे पर्याप्त समय नहीं दिया जाता।
समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया ने भी कहा कि विपक्ष ने यह प्रस्ताव लोकसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए लाया है। उनका कहना था कि अध्यक्ष को सदन के सभी वर्गों का विश्वास बनाए रखना चाहिए।
संसदीय परंपराओं पर बहस
भाजपा नेता अनुराग सिंह ठाकुर ने चर्चा के दौरान कहा कि अधिकांश सांसदों ने अध्यक्ष ओम बिरला की कार्यशैली की प्रशंसा की और स्वीकार किया कि उन्होंने सदस्यों को बोलने का अवसर दिया। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने अध्यक्ष के कार्यालय में अनुचित व्यवहार किया।
जनता दल (सेक्युलर) के सांसद मल्लेश बाबू ने भी कहा कि यह प्रस्ताव राजनीतिक प्रकृति का प्रतीत होता है। उन्होंने सदन में विरोध के दौरान सांसदों द्वारा कागज फेंकने और आरोप लगाने को संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताया।
प्रस्ताव खारिज होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की अगली बैठक कल सुबह 11 बजे होगी।
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