कवरत्ती/कदमथ, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
लक्षद्वीप में पर्यटन की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही कचरा संकट भी दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। सामुदायिक कूड़ेदान हटा दिए गए हैं और अब कचरा समुद्र के पास खुले डंपिंग यार्ड में जमा किया जा रहा है। पर्यटकों की संख्या में उछाल, प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल और समुचित योजना न होने से कचरा निपटान की समस्या और जटिल हो गई है। इसका असर समुद्र तट, लैगून, मछली पालन और निवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिख रहा है।
पर्यटन बूम और कचरा प्रबंधन की विफलता
लक्षद्वीप प्रशासन ने साल 2023 में द्वीप की जैव-विविधता को बहाल करने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की थी। इसमें पुरस्कार जीतने वाली लघु फिल्म ने लोगों को इधर-उधर कचरा फेंकने की बजाय सामुदायिक कूड़ेदान का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया था। लेकिन दो साल बाद ही एक वीडियो में दिखा कि ये सामुदायिक कूड़ेदान हटा दिए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सबिथ पी.के. ने इसे “विडंबना” बताते हुए कहा कि यह लक्षद्वीप में कचरा प्रबंधन संकट का साफ चित्र है।
अप्रैल-जून 2024 में पर्यटकों की संख्या में साल-दर-साल 107% की बढ़ोतरी हुई। 2024 में इस अवधि में 22,990 सैलानी आए, जबकि 2023 में यही संख्या 11,074 थी। ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip ने लक्षद्वीप के लिए ऑनलाइन सर्च में 3,400% की बढ़ोतरी दर्ज की। लेकिन पर्यटन बढ़ने के साथ कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है।
कचरा प्रबंधन की पुरानी व्यवस्था और नाकामी
दिसंबर 2020 में प्रफुल्ल पटेल के केंद्र शासित प्रदेश प्रशासक बनने से पहले कचरा प्रबंधन पुरानी व्यवस्था पर चलता था। पर्यावरण और वन विभाग के सफाई कर्मचारी सभी 10 आबाद द्वीपों से कचरा इकट्ठा करते थे। इसे कचरा संग्रह केंद्र (CGD) में ले जाकर छांटा जाता था। रिसाइकल होने वाला कचरा मुख्य भूमि भेजा जाता था, जबकि डायपर और सैनिटरी नैपकिन जैसे कचरे को स्थानीय स्तर पर जलाया जाता था।
2021 में कचरा प्रबंधन के लिए निविदा जारी की गई थी। इसमें बताया गया कि 10 द्वीपों पर कुल 3,737 कूड़ेदान लगाए गए थे और रोजाना करीब 12 टन प्लास्टिक/ठोस कचरा निकलता था। लेकिन व्यवस्था में खामियां थीं। वेंडर डायपर और सैनिटरी पैड ले जाने से इनकार करते थे। परिवहन में देरी होती थी। पिछले चार सालों से कोई कचरा मुख्य भूमि नहीं भेजा गया। इंसीनेरेटर पिछले 8 साल से बंद पड़े हैं।
मार्च 2022 में 3,500 सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंप दी गई। लेकिन ठेका देने की नाकाम कोशिश के बाद पंचायतों ने सामुदायिक कूड़ेदान हटा दिए। अब हफ्ते में सिर्फ एक बार गाड़ी घरों से कचरा इकट्ठा करती है और बिना अलग किए डंपिंग यार्ड में डाल देती है।
पर्यटन, मछली पालन और स्वास्थ्य पर असर
आगत्ती के टूर ऑपरेटर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पर्यटन बढ़ने से रोजाना सैकड़ों सिंगल-यूज बोतलें फेंकी जाती हैं, लेकिन बोतल क्रशर या तय जगह नहीं है। सरकार हर सैलानी से ₹200 हेरिटेज फीस लेती है, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा।
कवरत्ती के गोताखोर समीर अमन ने कहा कि पानी के अंदर हर जगह डाइपर पड़े हैं। मछुआरे मुहम्मद शाहजहां ने बताया कि वे तटों से कचरा उठाते हैं, लेकिन कूड़ेदान न होने से मुश्किल हो जाती है।
शोधकर्ता जॉन एडम ने कहा कि प्लास्टिक का माइक्रोप्लास्टिक में बदलना समुद्री खाद्य श्रृंखला के लिए खतरा है। कवरत्ती के आसपास टूना मछली की आंतों में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए हैं। लक्षद्वीप में टूना प्रोसेसिंग और निर्यात प्रमुख आर्थिक गतिविधियां हैं।
मेडिकल कचरा और प्रशासनिक नाकामी
मेडिकल कचरे का निपटान भी बड़ी समस्या है। कवरत्ती के इंदिरा गांधी अस्पताल पर दिसंबर 2024 में खुले में बायोमेडिकल कचरा जलाने के आरोप लगे थे। अस्पताल ने इनकार किया, लेकिन गवाह सदाकत ने कहा कि हर दिन निकलने वाले खतरनाक कचरे का कोई उचित निपटान नहीं है।
यूथ कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजमल अहमद ने कहा कि यह संकट व्यापक प्रशासनिक नाकामी है। फोकस बड़े प्रोजेक्ट्स पर है, लेकिन कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सेवाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्यटक वृद्धि | अप्रैल-जून 2024 में 107% बढ़ोतरी (22,990 सैलानी) |
| कचरा उत्पादन | रोजाना 12 टन प्लास्टिक/ठोस कचरा (2021 आंकड़ा) |
| मुख्य समस्या | सामुदायिक कूड़ेदान हटाए गए, खुले डंपिंग यार्ड |
| असर | समुद्र तट, लैगून, मछली पालन, स्वास्थ्य पर खतरा |
| मेडिकल कचरा | उचित निपटान व्यवस्था नहीं, अस्पतालों पर जिम्मेदारी |
| प्रशासनिक स्थिति | 2022 में 3,500 सफाई कर्मचारी निकाले गए, पंचायतों को जिम्मेदारी |
लक्षद्वीप में पर्यटन का तेज विकास एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ कचरा प्रबंधन की लचर व्यवस्था ने पर्यावरण, मछली पालन और स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया है। सामुदायिक कूड़ेदान हटने और इंसीनेरेटर बंद होने से समस्या और जटिल हो गई है। स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। अगर समय रहते योजना नहीं बनी, तो यह खूबसूरत द्वीपसमूह पर्यावरणीय संकट का शिकार हो सकता है।




