Tuesday, February 17, 2026
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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: समावेशी विकास के लिए भारत के संप्रभु एआई रोडमैप पर मंथन

नई दिल्ली | वेब वार्ता

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में आयोजित “भारत की संप्रभु एआई और डेटा से प्रभाव का विस्तार” विषयक सत्र में देश के डिजिटल भविष्य को लेकर व्यापक मंथन किया गया। इस सत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का केवल उपभोक्ता न बनकर, वैश्विक स्तर पर प्रभावी और भरोसेमंद एआई प्रणालियों का अग्रणी निर्माता बन सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि एआई क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए दीर्घकालिक शोध, नवाचार निवेश और कुशल मानव संसाधन का विकास अत्यंत आवश्यक है। अल्पकालिक उपायों से स्थायी सफलता संभव नहीं है।

संप्रभु एआई के तीन प्रमुख स्तंभ

पैनल चर्चा में भारत की एआई संप्रभुता के तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया गया। पहला, भारतीय भाषाओं और सामाजिक संदर्भों के अनुरूप स्वदेशी एआई मॉडलों का विकास। दूसरा, मजबूत घरेलू डिजिटल और तकनीकी अवसंरचना का निर्माण। तीसरा, आधारभूत शोध और अकादमिक संस्थानों को सशक्त बनाना।

वक्ताओं का मानना था कि इन तीनों पहलुओं पर संतुलित कार्य किए बिना भारत वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका नहीं निभा सकता।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ा एआई

सत्र में इस बात पर भी सहमति बनी कि उन्नत एआई शोध को देश की प्रमुख जरूरतों जैसे वित्तीय समावेशन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन व्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि एआई तभी सार्थक सिद्ध होगा, जब वह आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने और सामाजिक असमानताओं को कम करने में सहायक बने।

डिजिटल शासन पर अभिषेक सिंह का दृष्टिकोण

श्री अभिषेक सिंह, महानिदेशक, :contentReference[oaicite:0]{index=0} तथा अतिरिक्त सचिव, :contentReference[oaicite:1]{index=1} ने कहा कि संप्रभु एआई का अर्थ वैश्विक सहयोग से कट जाना नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई संप्रभुता का मतलब यह है कि एआई प्रणालियों के डिज़ाइन, परिनियोजन और शासन पर भारत का पूर्ण नियंत्रण हो। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और वित्तीय समावेशन जैसी वास्तविक समस्याओं के समाधान में होना चाहिए।

BharatGen के सीईओ ऋषि बाल की राय

श्री ऋषि बाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, :contentReference[oaicite:2]{index=2} ने कहा कि एआई का विस्तार चरणबद्ध और संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि शासन, नागरिक सेवाएं और वित्त जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से शुरुआत करना अधिक सुरक्षित और प्रभावी होगा। उन्होंने साझा डिजिटल अवसंरचना के निर्माण पर विशेष बल दिया।

अंतरिक्ष क्षेत्र में एआई की भूमिका

श्री राजीव रतन चेतवानी, निदेशक, सूचना प्रणाली एवं प्रबंधन निदेशालय, :contentReference[oaicite:3]{index=3} ने एआई के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग होने वाली एआई प्रणालियां इंटरनेट पर निर्भर न होकर ऑफलाइन संचालित होनी चाहिए। साथ ही वे पारदर्शी और ऑडिट योग्य होनी चाहिए।

उन्होंने व्याख्येय मॉडलों, डेटा वंशावली और सुरक्षित प्रशिक्षण प्रणालियों की आवश्यकता पर भी बल दिया।

भू-स्थानिक डेटा से विकास को बढ़ावा

विशेषज्ञों ने बताया कि भारत के विशाल भू-स्थानिक डेटा संसाधनों का एआई के माध्यम से उपयोग कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जलवायु पूर्वानुमान और शहरी नियोजन को सशक्त किया जा सकता है।

इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर सहमति

सत्र के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को एआई क्षेत्र में दीर्घकालिक क्षमता निर्माण, संस्थागत सहयोग और सतत निवेश की नीति अपनानी होगी।

इसके लिए सरकार, निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

निष्कर्ष

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का यह सत्र भारत के डिजिटल भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। संप्रभु, सुरक्षित और समावेशी एआई के माध्यम से भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर हो सकता है। विशेषज्ञों की साझा प्रतिबद्धता ने देश के एआई पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की है।

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