नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते समुद्री संकट के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में नंदा देवी और शिवालिक जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन अब भी कम से कम 6 बड़े जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। इन जहाजों में भारी मात्रा में एलपीजी भरी हुई है, जो भारत की घरेलू जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस स्थिति ने देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
एलपीजी का बड़ा भंडार होर्मुज में अटका
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| फंसे हुए एलपीजी जहाज | 6 जहाज |
| कुल एलपीजी मात्रा | लगभग 3 लाख टन |
| भारत की संभावित जरूरत | करीब 3 दिन का स्टॉक |
मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, होर्मुज में फंसे इन 6 जहाजों में करीब 3 लाख टन एलपीजी मौजूद है। यदि यह गैस भारत पहुंचती है तो देश के पास अतिरिक्त तीन से चार दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध हो सकता है।
पहले पहुंचे जहाजों का स्टॉक खत्म होने की कगार पर
हाल ही में नंदा देवी और शिवालिक जहाजों के जरिए भारत में करीब 92,700 टन एलपीजी पहुंची थी। यह मात्रा देश की केवल एक दिन या उससे थोड़े अधिक समय की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी। अब यह स्टॉक भी लगभग समाप्त होने की स्थिति में है, जिससे आपूर्ति संकट और गहरा सकता है।
- नंदा देवी और शिवालिक से 92,700 टन एलपीजी पहुंची
- यह केवल एक दिन की जरूरत पूरी कर सकी
- अब नए स्टॉक की तत्काल जरूरत
अन्य जहाज भी फंसे, सप्लाई चेन पर असर
| जहाज का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) | 4 |
| कंटेनर जहाज | 3 |
| एलएनजी टैंकर | 1 |
| केमिकल उत्पाद जहाज | 1 |
| बल्क करियर | 2 |
एलपीजी के अलावा भी कुल 16 अन्य जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं, जिनमें कच्चा तेल, एलएनजी, कंटेनर और अन्य उत्पाद शामिल हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
भारत-ईरान वार्ता जारी, समाधान का इंतजार
भारत और ईरान के बीच इस संकट को लेकर लगातार बातचीत जारी है, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है जिससे इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। भारतीय अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जहाजों को जल्द निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे जहाज भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। हालांकि तेल की उपलब्धता पर तत्काल असर नहीं दिख रहा, लेकिन घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की कमी की आशंका बढ़ गई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में आम जनता को गैस आपूर्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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