गृहमंत्री शाह ने बताई जस्टिस यशवंत वर्मा पर एफआईआर नहीं होने की वजह

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर कैश मिलने के मामले में पूरे देश में हलचल है। सुप्रीम कोर्ट से संसद तक इस कैश कांड की गूंज सुनाई दी। सुप्रीम कोर्ट ने तो यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका ही खारिज कर दी। सबके मन में सवाल है कि आखिर जस्टिस यशवंत वर्मा के घर अनगिनत कैश मिले तो एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है? इसका जवाब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद दिया है।

एक कार्यक्रम में शाह ने जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अनुमति के बाद ही एफआईआर दर्ज की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जजों का एक पैनल मामले को देख रहा है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। जस्टिस वर्मा के आवास से नकदी बरामदगी के मामले पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि सीजेआई संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताई गई प्रक्रिया के तहत मामले का संज्ञान लिया और जांच के लिए जजों की एक समिति का गठन किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग समिति द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज मुहैया करा रहे हैं। वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। जजों की समिति मामले में फैसला लेगी और अपने फैसले को सार्वजनिक करेगी। हमें समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।

इससे पहले शुक्रवार को जज यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रही जांच के बीच सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें जज के घर से कैश मिलने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने कहा कि मामले की आंतरिक जांच चल रही है और जांच के बाद भारत के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के पास कई विकल्प होंगे। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी जनहित याचिका पर थी। दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के जज हैं। इससे पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज थे।

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