नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता
राज्यसभा के उपसभापति और जेडीयू के वरिष्ठ नेता हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने जा रहा है। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने सदन में जानकारी दी कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे समेत कुल 59 सदस्य अपने कार्यकाल की अवधि पूरी कर रहे हैं। इस घटनाक्रम के साथ ही उच्च सदन में बड़े बदलाव की संभावना बन गई है।
राज्यसभा में बड़े स्तर पर बदलाव
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल रिटायर होने वाले सदस्य | 59 |
| राज्यों की संख्या | 25 |
| कार्यकाल समाप्ति तिथि | 9 अप्रैल 2026 |
इन सदस्यों में कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे शामिल हैं, जिससे आने वाले समय में राज्यसभा की राजनीतिक संरचना में बदलाव देखने को मिल सकता है।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव में पूरी की और बाद में वाराणसी जाकर यूपी कॉलेज से इंटरमीडिएट और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल किया।
- टाइम्स ग्रुप से करियर की शुरुआत
- बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी (1981-84)
- प्रभात खबर में लंबे समय तक संपादकीय भूमिका
राजनीति में एंट्री और संसदीय सफर
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 2014 | पहली बार राज्यसभा सदस्य बने |
| 2018 | राज्यसभा के उपसभापति चुने गए |
| 2020 | दोबारा उपसभापति बने |
| 2026 | दूसरा कार्यकाल समाप्त |
2014 में जेडीयू के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे हरिवंश को 2018 में उपसभापति चुना गया था। 2020 में उन्हें फिर से इस पद की जिम्मेदारी दी गई, जिसे वे वर्तमान में निभा रहे हैं।
नीतीश कुमार के करीबी, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरण
हरिवंश को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के बावजूद उन्होंने संवैधानिक पद का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। इससे वे बीजेपी नेतृत्व के भी करीब माने जाने लगे। नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति और प्रधानमंत्री की सराहना ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया।
आगे क्या?
हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें दोबारा मौका मिलेगा या राज्यसभा में नए चेहरे देखने को मिलेंगे। यह निर्णय आने वाले राजनीतिक समीकरणों और दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है, जहां उन्होंने पत्रकारिता से लेकर संसदीय नेतृत्व तक का लंबा सफर तय किया। अब उनके कार्यकाल की समाप्ति के साथ राज्यसभा में नए बदलावों की शुरुआत होने वाली है, जो भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
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