नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस वीडियो का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि भारत-अमरीका व्यापार समझौता भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। अधिकारियों के अनुसार, यह वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार कर भ्रम फैलाने के उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने किया दावे का खंडन
सरकार की ओर से संचालित :contentReference[oaicite:0]{index=0} (पीआईबी) की तथ्य जांच इकाई ने वायरल वीडियो की जांच के बाद इसे फर्जी और भ्रामक करार दिया है। पीआईबी ने कहा कि इस वीडियो में जानबूझकर गलत सूचनाएं प्रस्तुत की गई हैं, जिससे आम जनता और किसानों को गुमराह किया जा सके।
भारत-अमरीका व्यापार समझौते पर सरकार की स्थिति
सरकार ने साफ किया है कि भारत-अमरीका व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध उत्पादन क्षेत्रों से संबंधित किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है। सभी प्रमुख फसलों, अनाजों, फलों और दुग्ध उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है।
व्यापार समझौते से जुड़े प्रमुख तथ्य
| विषय | सरकारी स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|
| कृषि क्षेत्र | पूरी तरह संरक्षित | किसानों को नुकसान नहीं |
| दुग्ध उत्पादन | कोई समझौता नहीं | स्थानीय उद्योग सुरक्षित |
| बाजार पहुंच | कोई नया दबाव नहीं | स्थिर व्यापार व्यवस्था |
| वायरल वीडियो | एआई-निर्मित और भ्रामक | जनता में भ्रम |
- दावा: किसानों को नुकसान
- सच्चाई: दावा भ्रामक
- जांच: पीआईबी फैक्ट चेक द्वारा
- स्थिति: कृषि क्षेत्र सुरक्षित
एआई से बने फर्जी वीडियो पर चिंता
अधिकारियों ने बताया कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य गलत सूचना फैलाना और सरकारी नीतियों के प्रति अविश्वास पैदा करना है। सरकार ने इसे डिजिटल युग की एक गंभीर चुनौती बताते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
नागरिकों से की गई विशेष अपील
पत्र सूचना कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी समाचार या वीडियो पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि जरूर करें। सोशल मीडिया पर मिलने वाली अपुष्ट सूचनाओं को आगे साझा करने से बचने की भी सलाह दी गई है।
किसानों के हितों की सुरक्षा पर सरकार का जोर
सरकार ने दोहराया है कि सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में किसानों और घरेलू उत्पादकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। किसी भी नीति या समझौते से पहले व्यापक विचार-विमर्श और प्रभाव मूल्यांकन किया जाता है।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो भारत-अमरीका व्यापार समझौते को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास है, जिसे सरकार और पीआईबी फैक्ट चेक ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों, कृषि और दुग्ध क्षेत्र के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। ऐसे में नागरिकों का दायित्व है कि वे केवल प्रमाणित और विश्वसनीय सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
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