नई दिल्ली, राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
गंगोत्री धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का एक अहम बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मस्जिदें, मदरसे और दरगाहें सभी धर्मों के लोगों के लिए खुली हैं। मौलाना रशीदी ने हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय के लोगों को आमंत्रित करते हुए कहा कि वे स्वयं आकर देखें कि इन धार्मिक स्थलों में क्या सिखाया जाता है और वहां रहने वाले लोग किस तरह की सोच रखते हैं।
धर्म किसी को धार्मिक स्थल पर जाने से नहीं रोकता
मौलाना साजिद रशीदी ने अपने बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया कि धर्म कभी भी किसी व्यक्ति को किसी धार्मिक स्थल पर जाने से नहीं रोकता। उन्होंने कहा कि इस्लाम की बुनियादी शिक्षा में ज्ञान, संवाद और आपसी सम्मान को सर्वोपरि रखा गया है। उनका कहना था कि यदि लोग बिना पूर्वाग्रह के एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों को समझने का प्रयास करें, तो समाज में फैली कई गलतफहमियां अपने आप दूर हो जाएंगी।
धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन का दिया उदाहरण
मौलाना रशीदी ने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं वेद, गीता, उपनिषद, रामायण और मनुस्मृति जैसे हिंदू धर्मग्रंथों का अध्ययन किया है। उनके अनुसार, इन सभी ग्रंथों का मूल संदेश प्रेम, सहिष्णुता और आपसी सम्मान पर आधारित है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का वास्तविक स्वरूप नफरत या टकराव नहीं सिखाता, बल्कि मानवता को जोड़ने का काम करता है।
विवाद खड़ा करने वालों पर जताई चिंता
गंगोत्री धाम विवाद के संदर्भ में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि वर्तमान समय में जो लोग इस तरह के मुद्दों को उछाल रहे हैं, उनकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे लोग या तो मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास कर रहे हैं या फिर समाज में विभाजन पैदा करना चाहते हैं। इसी क्रम में उन्होंने संबंधित एजेंसियों से ऐसे तत्वों पर कड़ी नजर रखने की अपील की।
धार्मिक स्थलों की खुलापन से दूर होंगी गलतफहमियां
मौलाना रशीदी का मानना है कि यदि धार्मिक स्थलों के द्वार सभी के लिए खुले रहें और लोग एक-दूसरे की परंपराओं को नजदीक से समझें, तो सामाजिक तनाव अपने आप कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थानों की यात्रा किसी भी व्यक्ति के लिए वर्जित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह आपसी समझ और सौहार्द को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती है।
सद्भाव और सहिष्णुता का संदेश
अपने पूरे बयान में मौलाना साजिद रशीदी ने बार-बार इस बात को दोहराया कि धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन उन्हें नफरत नहीं, बल्कि प्रेम और सम्मान का पाठ पढ़ाता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में धार्मिक मुद्दों पर बहस तेज होती जा रही है।
निष्कर्ष
गंगोत्री धाम विवाद के बीच मौलाना साजिद रशीदी का यह बयान धार्मिक सहिष्णुता और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है। मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को सभी के लिए खोलने की उनकी अपील यह संदेश देती है कि विश्वास और समझ के जरिए ही समाज में शांति कायम रह सकती है। ऐसे बयानों से यह स्पष्ट होता है कि संवाद और पारदर्शिता ही किसी भी विवाद का स्थायी समाधान हो सकते हैं।
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