नई दिल्ली/देहरादून, इंफ्रास्ट्रक्चर डेस्क | वेब वार्ता
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अप्रैल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, अप्रैल के पहले सप्ताह या केदारनाथ धाम के कपाट खुलने (22 अप्रैल) के आसपास पीएम उत्तराखंड दौरे पर आ सकते हैं। करीब 210-211 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर अब महज 2 से 2.5 घंटे में पूरा हो सकेगा।
सफर होगा तेज और आसान
अभी दिल्ली से देहरादून पहुंचने में लगभग 6 से 6.5 घंटे का समय लगता है, लेकिन एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह दूरी आधे से भी कम समय में तय की जा सकेगी। एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों के शुरू होने से पहले ही यात्रियों को जाम से राहत मिलने लगी है।
एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| लंबाई | लगभग 210-211 किमी |
| लेन | 6 लेन एक्सप्रेसवे |
| लागत | करीब ₹13,000 करोड़ |
| रूट | अक्षरधाम (दिल्ली) से देहरादून |
| समय (पहले) | 6–6.5 घंटे |
| समय (अब) | 2–2.5 घंटे |
कई राज्यों को मिलेगा फायदा
यह एक्सप्रेसवे न केवल दिल्ली और उत्तराखंड को जोड़ेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को भी तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे जिलों के लोगों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।
- दिल्ली-एनसीआर से तेज कनेक्टिविटी
- जाम से राहत, वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध
- पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा
पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
एक्सप्रेसवे के शुरू होने से उत्तराखंड की पर्यटन गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली से देहरादून और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचना आसान हो जाएगा, जिससे सैलानियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही व्यापारियों और उद्योग जगत के लिए भी यह परियोजना गेमचेंजर साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है, जो यात्रा समय को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा। इसके शुरू होने से आम यात्रियों से लेकर पर्यटन और उद्योग तक सभी को व्यापक लाभ मिलेगा।
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