नई दिल्ली | वेब वार्ता
कांग्रेस ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि जहां सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत और संतुलित बताने का दावा कर रही है, वहीं वास्तविकता में रोजगार के अवसर घटे हैं, आर्थिक असमानता बढ़ी है और जीडीपी के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार, आम लोगों की आर्थिक हालत लगातार खराब होती जा रही है।
‘रियल स्टेट ऑफ द इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट जारी
कांग्रेस के पूर्व सांसद और एआईसीसी रिसर्च विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजीव गौड़ा ने मंगलवार को कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की वार्षिक रिपोर्ट ‘रियल स्टेट ऑफ द इकोनॉमी 2026’ जारी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर पेश कर रही है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में रोजगार घटा
रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में रोजगार का हिस्सा घटा है, जबकि कृषि पर निर्भर आबादी बढ़ी है। प्रो. गौड़ा ने कहा कि रोजगार वृद्धि मुख्य रूप से कम वेतन वाले, गिग इकोनॉमी और अनौपचारिक क्षेत्र में हो रही है, जहां न तो स्थायी कॉन्ट्रैक्ट हैं और न ही सामाजिक सुरक्षा की गारंटी।
रोजगार और आय से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष
| आर्थिक संकेतक | रिपोर्ट के निष्कर्ष |
|---|---|
| रोजगार का स्वरूप | गिग और अनौपचारिक क्षेत्र में वृद्धि |
| मैन्युफैक्चरिंग रोजगार | हिस्सा घटा |
| सामाजिक सुरक्षा | अधिकांश नए रोजगारों में अनुपस्थित |
| कृषि पर निर्भरता | लगातार बढ़ रही |
तेजी से बढ़ रही आर्थिक असमानता
कांग्रेस ने देश में आर्थिक असमानता के बढ़ते स्तर पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी राष्ट्रीय आय और संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपने पास रखती है, जबकि देश की आधी आबादी को बेहद सीमित हिस्सा ही मिल पाता है। प्रो. गौड़ा ने दावा किया कि पांच में से चार भारतीय आज भी 200 रुपये प्रतिदिन से कम आय पर जीवन यापन कर रहे हैं।
जीडीपी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल
प्रो. राजीव गौड़ा ने सरकार द्वारा जारी जीडीपी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इन आंकड़ों को ‘सी ग्रेड’ दिया है। इसके अलावा, भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के आकलन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आधिकारिक जीडीपी आंकड़े वास्तविकता से कम से कम 2.5 प्रतिशत अधिक बताए जा रहे हैं।
रुपया कमजोर, एफडीआई नकारात्मक
कांग्रेस नेता ने बताया कि पिछले एक वर्ष में एशिया में भारतीय रुपये का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है। इसके साथ ही नेट एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) नकारात्मक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल हजारों करोड़पति देश छोड़कर विदेशों में निवेश कर रहे हैं, जो देश की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ के दावे पर सवाल
प्रो. गौड़ा ने केंद्र सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ यानी पूरी तरह संतुलित स्थिति में होने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उनके अनुसार, बढ़ती असमानता, कमजोर रोजगार और घटती क्रय शक्ति यह दिखाती है कि आम जनता आर्थिक दबाव में है।
निष्कर्ष
कांग्रेस की रिपोर्ट और उसके नेताओं के आरोपों ने देश की आर्थिक दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पार्टी का कहना है कि केवल आंकड़ों की चमक दिखाने के बजाय सरकार को रोजगार सृजन, असमानता कम करने और पारदर्शी आर्थिक आंकड़े प्रस्तुत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम नागरिकों की स्थिति में वास्तविक सुधार हो सके।
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