नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर अलगाववादी राजनीति को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने 14 जनवरी 2026 को कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति में अलगाववाद का ‘टेक्स्टबुक उदाहरण’ हैं। यह बयान अभिनेता-राजनीतिज्ञ विजय की फिल्म ‘जना नायगन’ के सेंसर सर्टिफिकेट विवाद से जुड़ा है, जहां राहुल ने केंद्र सरकार पर तमिल संस्कृति को दबाने का आरोप लगाया था। पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ के लिए क्षेत्रवाद, जातिवाद और भाषा के नाम पर देश को बांटने का आरोप लगाया, जो राष्ट्र की एकता और शांति को नुकसान पहुंचाता है। इस घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है, जहां भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल भाषा और संस्कृति को दिए गए सम्मान को प्रमुखता से रेखांकित किया।
अलगाववाद की राजनीति: भाजपा का राहुल पर सीधा आरोप
भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुरु प्रकाश पासवान ने राहुल गांधी की राजनीति को ‘बेहद शर्मनाक और निराधार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल का बयान वास्तविकता या तर्क से कोई लेना-देना नहीं रखता। पासवान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राजनीतिक फायदे के लिए क्षेत्रीय, जातीय और भाषाई विभाजन को बढ़ावा देते हैं। भाजपा ने राहुल को ‘भारतीय राजनीति में अलगाववाद का परफेक्ट केस स्टडी’ बताया और उन्हें क्षेत्र, भाषा व जाति के नाम पर विभाजनकारी राजनीति से दूर रहने की सलाह दी। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे बयान देश की एकता को कमजोर करते हैं और विपक्षी दलों की हताशा को दर्शाते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आपातकाल जैसे कदमों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का भी आरोप लगाया। भाजपा ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा तमिल संस्कृति का सम्मान किया है, जबकि कांग्रेस ने जल्लीकट्टू का विरोध कर तमिल गौरव को चोट पहुंचाई।
राज्य दर राज्य बदलती राजनीति: राहुल का पैटर्न उजागर
प्रवक्ता ने राहुल गांधी की राजनीति को ‘राज्य-दर-राज्य बदलने वाली’ बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में राहुल जातीय उन्माद फैलाते हैं, जबकि तमिलनाडु में तमिल पहचान के नाम पर नकारात्मक राजनीति करते हैं। पासवान ने राहुल के हालिया तमिलनाडु दौरे का जिक्र किया, जहां उन्होंने गुडलूर के थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल में बच्चों से बातचीत में अपनी बचपन की यादें साझा कीं, लेकिन राजनीतिक रूप से तमिल संस्कृति पर हमले का आरोप लगाकर विवाद खड़ा कर दिया। भाजपा ने इसे राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण बताया, जो देश की एकता के लिए खतरा है। प्रवक्ता ने कहा कि ‘वन इंडिया, ग्रेट इंडिया’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि मोदी सरकार की प्रतिबद्धता है, जो सभी भाषाओं और संस्कृतियों को समान सम्मान देती है।
मोदी सरकार की तमिल संस्कृति को मजबूती: अभूतपूर्व संवेदनशीलता और प्रयास
भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल भाषा, संस्कृति और पहचान को दिए गए सम्मान पर विशेष जोर दिया। पासवान ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने तमिल विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया है। सरकार ने तमिल को संयुक्त राष्ट्र और जी-20 जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म पर प्रतिनिधित्व दिया, जो तमिल लोगों के लिए गर्व की बात है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने और सम्मान देने पर जोर देते हैं।
मोदी सरकार के प्रमुख प्रयासों को निम्न तालिका में दर्शाया गया है, जो तमिल संस्कृति के संरक्षण, प्रचार और लोगों को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं:
| प्रयास | विवरण | लाभ |
|---|---|---|
| काशी-तमिल संगमम | काशी और तमिलनाडु की संस्कृतियों को जोड़ने वाला अनोखा कार्यक्रम, जो ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करता है। | लाखों लोगों को सांस्कृतिक एकता का अनुभव, युवाओं में राष्ट्रीय गौरव की भावना बढ़ाना। |
| सेंगोल स्थापना | संसद में चोल काल की तमिल परंपरा का सम्मान, जो लोकतंत्र के मंदिर में तमिल विरासत को स्थान देता है। | तमिल इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता, सांस्कृतिक गौरव में वृद्धि और लाखों तमिलों को प्रेरणा। |
| फिजी में तमिल पाठ्यक्रम | 80 वर्षों बाद फिजी में तमिल भाषा शिक्षा की शुरुआत, भारत सरकार के समर्थन से। | वैश्विक स्तर पर तमिल भाषा का प्रसार, प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़ना और सांस्कृतिक निरंतरता। |
| पोंगल उत्सव और थिरुक्कुरल | पीएम मोदी द्वारा पोंगल पर तमिल संस्कृति की सराहना, थिरुक्कुरल जैसे ग्रंथों का उल्लेख। | प्रकृति और समाज के साथ संतुलन की शिक्षा, किसानों को मजबूती और सांस्कृतिक उत्सवों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार। |
| वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व | संयुक्त राष्ट्र और जी-20 में तमिल को स्थान, जो पूरे मानवता की साझा विरासत है। | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तमिल की पहचान, भारत की सॉफ्ट पावर में वृद्धि और वैश्विक सम्मान। |
ये प्रयास न केवल तमिल लोगों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। मोदी सरकार ने तमिल को ‘प्राचीनतम जीवित सभ्यता’ के रूप में मान्यता दी, जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ती है और शिक्षा, पर्यटन तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान में वृद्धि करती है।
‘जना नायगन’ विवाद की पूरी कहानी: सिनेमा से राजनीति तक का सफर
यह विवाद अभिनेता विजय की फिल्म ‘जना नायगन’ के सेंसर सर्टिफिकेट में देरी से शुरू हुआ। विजय, जो तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) चला रहे हैं, की यह फिल्म राजनीतिक मुद्दों पर आधारित बताई जा रही है। मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर स्टे दिया था, लेकिन अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। राहुल गांधी ने इसे तमिल संस्कृति पर हमला बताया, जबकि भाजपा ने आरोपों को निराधार करार दिया। प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला अदालत में है और राहुल के बयान राजनीतिक लाभ के लिए हैं। यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में विजय को केंद्र में ला रहा है, जहां सिनेमा और राजनीति का गहरा संबंध है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी देरी की निंदा की थी।
राहुल गांधी का बयान: तमिल आवाज दबाने का आरोप और भाजपा का पलटवार
13 जनवरी 2026 को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा ‘जना नायगन’ को रोकने की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है। उन्होंने कहा, “मिस्टर मोदी, आप कभी भी तमिल लोगों की आवाज को दबाने में सफल नहीं होंगे।” राहुल तमिलनाडु के गुडलूर में थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल में बच्चों से मिले थे, जहां उन्होंने अपनी केमिस्ट्री टीचर की यादें साझा कीं। लेकिन उनका राजनीतिक बयान विवादास्पद बन गया, जिस पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया।
निष्कर्ष: एकता की मजबूती से राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य
यह विवाद दर्शाता है कि राजनीतिक लाभ के लिए सांस्कृतिक मुद्दों का उपयोग देश की एकता को कमजोर कर सकता है। लेकिन मोदी सरकार के प्रयासों से तमिल संस्कृति को न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर सम्मान मिला है, जो लाखों तमिल लोगों को लाभ पहुंचा रहा है और सांस्कृतिक सद्भाव को मजबूत कर रहा है। ऐसे में अलगाववादी राजनीति से दूर रहकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को अपनाना आवश्यक है। यह न केवल तमिल संस्कृति को संरक्षित रखेगा, बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास, शिक्षा और सांस्कृतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। अंत में, पोंगल जैसे त्योहार हमें प्रकृति और समाज के साथ संतुलन सिखाते हैं, जो मोदी सरकार की योजनाओं में प्रतिबिंबित होता है।
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