Monday, January 26, 2026
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बंगाल चुनाव की गर्मी: नेताजी की जयंती बनी सियासी रणभूमि, तृणमूल और भाजपा में SIR को लेकर टकराव

कोलकाता, राजनीति डेस्क | वेब वार्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और इसी बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती सियासी जंग का केंद्र बन गई है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने शुक्रवार को नेताजी की विरासत को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।

नेताजी की 129वीं जयंती के अवसर पर आयोजित सरकारी और विपक्षी कार्यक्रमों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर टकराव खुलकर सामने आया। ममता बनर्जी सरकार ने जहां नेताजी के नाम पर केंद्र और चुनाव आयोग पर निशाना साधा, वहीं भाजपा ने इस आयोजन को “राजनीतिक नाटक” बताया।

ममता बनर्जी का केंद्र और आयोग पर हमला

रेड रोड पर आयोजित राज्य सरकार के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा — “अगर नेताजी आज जीवित होते, तो क्या उन्हें भी SIR की सुनवाई के लिए बुलाया जाता?”

मुख्यमंत्री ने नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस और अन्य लोगों को SIR प्रक्रिया के दौरान भेजे गए नोटिसों का ज़िक्र करते हुए निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर ‘भय और भ्रम फैलाने’ का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया से उत्पन्न तनाव और ‘घबराहट’ के कारण 100 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

ममता बनर्जी ने इसे ‘मानवता बनाम बर्बरता’ की लड़ाई बताते हुए कहा — “यह पांडवों और कौरवों की लड़ाई की तरह है, और हम सच्चाई के पक्ष में खड़े हैं।”

नेताजी को लेकर ममता बनर्जी की भावनात्मक अपील

मुख्यमंत्री ने नेताजी के ‘दिल्ली चलो’ के नारे को दोहराते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाना चाहिए।

उन्होंने योजना आयोग की जगह नीति आयोग बनाए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि योजना आयोग की अवधारणा स्वयं नेताजी की थी और केंद्र सरकार अब उनकी विचारधारा को मिटाने का प्रयास कर रही है।

चंद्र कुमार बोस मंच पर आए, कहा – “ममता बनें राष्ट्रीय नेता”

इस कार्यक्रम के दौरान नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करते दिखे। बोस, जो कभी बंगाल भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं, ने कहा — “मैं ममता दीदी से अनुरोध करता हूं कि वे सिर्फ बंगाल नहीं, बल्कि पूरे भारत की नेता के रूप में सोचें। नेताजी के आदर्श ही भारत की रक्षा कर सकते हैं।”

उनके इस बयान से बंगाल की सियासत में नया मोड़ आ गया है, क्योंकि बोस 2016 में भबनीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी रह चुके हैं।

भाजपा ने पलटवार किया, कहा – “राज्य सरकार बना रही तमाशा”

भाजपा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घर से नेताजी के एल्गिन रोड स्थित आवास तक पदयात्रा का नेतृत्व किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नेताजी की जयंती को “एक सुनियोजित तमाशा” में बदल रही है।

अधिकारी ने कहा कि कार्यक्रम के बाद जब वे चले गए, तो सरकारी अधिकारियों ने नेताजी की प्रतिमा पर उनके द्वारा चढ़ाई गई मालाएं हटा दीं। उन्होंने तृणमूल पर स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत पर एकाधिकार करने का आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अर्पित की श्रद्धांजलि

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में नेताजी को पुष्पांजलि अर्पित की। केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर नेताजी की विरासत के सम्मान का प्रतीक बताया, जिससे यह विवाद और गहरा गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में नेताजी की विरासत अब केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि चुनावी नैरेटिव का अहम हिस्सा बन चुकी है। तृणमूल जहां नेताजी को “संघर्ष और प्रतिरोध” के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं भाजपा उन्हें राष्ट्रवाद के नायक के रूप में दिखा रही है।

SIR पर सियासी टकराव जारी

नेताजी की जयंती अब बंगाल की सियासत में SIR (Special Intensive Revision of voter list) विवाद के साथ जुड़ गई है। विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों ही इसे जनता से जुड़ने का नया राजनीतिक मंच बना चुके हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, नेताजी की विरासत, बंगाल की अस्मिता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर यह सियासी जंग और तेज़ होती जाएगी।

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