Sunday, February 15, 2026
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सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं’, शंकराचार्य विवाद के बीच बाबा रामदेव का बड़ा बयान

पणजी (गोवा), राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

शंकराचार्य विवाद: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े हालिया विवाद के बीच योग गुरु बाबा रामदेव का बयान सनातन समाज और देश की राजनीति में नई बहस छेड़ गया है। गोवा के पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा कि ‘सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं, जबकि हमारे सामने पहले से ही भारत विरोधी और सनातन विरोधी शक्तियां सक्रिय हैं।’ उन्होंने संत समाज से संयम और एकजुटता बनाए रखने की अपील की।

शंकराचार्य विवाद के बीच क्यों अहम है रामदेव का बयान?

हाल के दिनों में प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कथित बदसलूकी और विरोध को लेकर संत समाज में मतभेद सामने आए हैं। इसी पृष्ठभूमि में बाबा रामदेव का यह बयान आया है, जिसे कई लोग सनातन समाज को एकजुट करने की अपील के रूप में देख रहे हैं। रामदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संतों का आपस में टकराव सनातन विरोधी ताकतों को मजबूत करता है।

‘गायों की रक्षा केवल नारों से नहीं होगी’

बाबा रामदेव ने अपने बयान में गौ-रक्षा को लेकर भी संत समाज को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि गायों की रक्षा केवल भाषण, सम्मेलन और नारेबाजी से संभव नहीं है। इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। रामदेव ने सुझाव दिया कि हर संत और आश्रम को कम से कम 5,000 से 10,000 गायों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पतंजलि पीठ इस समय करीब एक लाख गायों की देखभाल कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि “अगर शंकराचार्य और बड़े धार्मिक संस्थान अपने-अपने आश्रमों में गौ-सेवा को प्राथमिकता दें, तो गौ-रक्षा आंदोलन को वास्तविक मजबूती मिलेगी।”

राजनीति का भी किया जिक्र, दी चेतावनी

बाबा रामदेव ने अपने बयान में देश की राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ भारत विरोधी और सनातन विरोधी तत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को नुकसान पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। ऐसे माहौल में संतों और धार्मिक नेताओं को राजनीतिक नेतृत्व के प्रति अनावश्यक नाराजगी से बचना चाहिए।

रामदेव के अनुसार, “जब बाहरी ताकतें देश और सनातन को कमजोर करने में जुटी हों, तब आंतरिक मतभेद सबसे बड़ा खतरा बन जाते हैं।”

माघ मेले में भी जताई थी नाराजगी

इससे पहले बाबा रामदेव प्रयागराज के माघ मेले में संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। उस दौरान भी उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य बताया था।

बाबा रामदेव ने कहा था कि “योगियों और पूजनीय संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। साधु-संत का मूल स्वभाव अहंकार से मुक्त होना होता है।”

‘तीर्थ और धर्मस्थलों पर विवाद नहीं होना चाहिए’

रामदेव ने तीखे शब्दों में कहा कि तीर्थ स्थलों पर स्नान, पालकी या अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु वही है, जिसने अपने अभिमान को त्याग दिया हो। यदि संत समाज आपस में ही टकराएगा, तो सनातन विरोधी एजेंडे को बढ़ावा मिलेगा।

  • गौ-रक्षा: हर संत को प्रत्यक्ष जिम्मेदारी लेने की अपील
  • सनातन एकता: आपसी विवाद से बचने पर जोर
  • राजनीतिक संकेत: मोदी–शाह पर हमलों का जिक्र

कुल मिलाकर, बाबा रामदेव का यह बयान न केवल शंकराचार्य विवाद पर प्रतिक्रिया है, बल्कि सनातन समाज को एकजुट रहने का सख्त संदेश भी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संत समाज और राजनीतिक हलकों में इस बयान का क्या असर पड़ता है।

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