Monday, January 26, 2026
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86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन लखनऊ में शुरू: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विधानसभाओं की घटती अवधि पर जताई चिंता

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

20 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (All India Presiding Officers’ Conference) की शुरुआत हुई। तीन दिवसीय यह सम्मेलन (18-21 जनवरी 2026) उत्तर प्रदेश विधानसभा परिसर में आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने किया। सम्मेलन में देशभर के विधानसभा स्पीकरों, उप-स्पीकरों और विधायी निकायों के प्रमुखों ने भाग लिया। इस वर्ष का मुख्य फोकस विधानसभाओं की घटती अवधि, बहस की गुणवत्ता, पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती पर रहा।

ओम बिरला ने जताई चिंता, कहा – सत्रों की अवधि घट रही है

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि हाल के वर्षों में विधानसभाओं की बैठक की अवधि में निरंतर कमी आई है, जिससे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि “संसदीय संस्थानों की उपयोगिता तभी बनी रह सकती है जब वे जनता की आवाज़ और उम्मीदों का मंच बनें।” बिरला ने सभी पीठासीन अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सदन की कार्यवाही को अधिक सार्थक, अनुशासित और जनकेंद्रित बनाएं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भेजा संदेश, कहा – बहस से ही मजबूत होता है लोकतंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि “लोकतंत्र में बहस और चर्चाएं पारदर्शिता और निष्पक्षता की नींव हैं।” उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी सदन की गरिमा बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। यह सम्मेलन सीपीए इंडिया रीजनल सेक्रेटेरिएट (CPA India Regional Secretariat) के सहयोग से आयोजित किया गया।

मुख्य चर्चा बिंदु और उत्तर प्रदेश की भूमिका

  • विधानसभाओं में डिजिटल टूल्स के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • लंबित विधेयकों और प्रस्तावों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में सुझाव दिए गए।
  • सदस्यों की आचार संहिता और सदन में व्यवहार सुधार को लेकर दिशा-निर्देश प्रस्तावित हुए।
  • जनता से संवाद बढ़ाने और पेपरलेस विधानसभाओं को प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन की मेजबानी पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा डिजिटल पेपरलेस कार्यवाही में देश में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करती रहेगी।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त करने की दिशा में अहम मंच

यह सम्मेलन हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है और देश की विधायी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है। इस बार का आयोजन लखनऊ में होने से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विधायी क्षमता और नवाचारों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। सम्मेलन में विधानसभाओं की घटती सत्र अवधि (औसतन 25-30 दिन प्रति वर्ष) पर गंभीर मंथन हुआ, जिसे लोकतंत्र की सक्रियता के लिए चिंता का विषय माना गया।

प्रमुख उपस्थित नेता

  • लोकसभा अध्यक्ष – ओम बिरला
  • राज्यसभा उपसभापति – हरिवंश नारायण सिंह
  • उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष – सतीश महाना
  • विभिन्न राज्यों के विधानसभा स्पीकर और उप-स्पीकर

निष्कर्ष: लोकतंत्र को सशक्त करने की दिशा में ठोस पहल

लखनऊ में आयोजित 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन देश की विधानसभाओं के संचालन और कार्यप्रणाली को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की चिंता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि विधानसभाओं को अधिक सक्रिय, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनाना ही लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती है।

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