Sunday, January 25, 2026
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Breaking | अकोला–सांगली में भाजपा को झटका, शरद पवार के हाथ सत्ता की चाबी!

मुंबई, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता

Maharashtra Civic Polls 2026: महाराष्ट्र की नगर राजनीति में निकाय चुनावों के नतीजों ने बड़ा सियासी संकेत दे दिया है। अकोला और सांगली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार करने में नाकाम रही। इस सियासी गणित ने शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) को किंगमेकर की भूमिका में ला खड़ा किया है। अब दोनों नगर निगमों में सत्ता का रास्ता इसी पार्टी के रुख पर निर्भर करता नजर आ रहा है।

सांगली नगर निगम: एक सीट ने बदल दिया खेल

78 सदस्यीय सांगली–मिरज–कुपवाड़ नगर निगम में भाजपा को 39 सीटें मिली हैं, जबकि बहुमत के लिए 40 सीटों की जरूरत थी। यानी भाजपा सिर्फ एक सीट से सत्ता से दूर रह गई। कांग्रेस ने 18 सीटें जीती हैं, अजित पवार गुट की एनसीपी को 16, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 2 और एनसीपी (एसपी) को 3 सीटें मिली हैं।

यही तीन सीटें अब सांगली में सत्ता की चाबी बन गई हैं। यदि एनसीपी (एसपी) भाजपा का समर्थन करती है तो निगम में भाजपा का मेयर बनना तय माना जा रहा है, लेकिन यदि पार्टी महाविकास आघाड़ी के साथ रहती है, तो भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ सकता है।

अकोला नगर निगम: यहां भी अधूरी रह गई भाजपा की जीत

80 सदस्यीय अकोला नगर निगम में बहुमत के लिए 41 सीटों की जरूरत थी। यहां भाजपा को 38 सीटें मिलीं, जो बहुमत से तीन कम हैं। कांग्रेस ने 21 सीटें जीतीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को 6 सीटें मिलीं, जबकि एनसीपी (एसपी) ने यहां भी 3 सीटों के साथ निर्णायक स्थिति हासिल कर ली।

इसके अलावा एनसीपी (अजित पवार) और शिवसेना (शिंदे गुट) को 1-1 सीट मिली है, जबकि AIMIM, VBA और निर्दलीय मिलकर 10 पार्षद हैं। इस बिखरे जनादेश में बिना एनसीपी (एसपी) के समर्थन के किसी भी दल के लिए सत्ता बनाना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

NCP (SP) की बढ़ी सियासी ताकत

दोनों नगर निगमों में भले ही एनसीपी (एसपी) के पास सिर्फ तीन-तीन पार्षद हों, लेकिन यही संख्या उन्हें किंगमेकर बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार इन नतीजों के जरिए यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि उनकी पार्टी अब भी सत्ता संतुलन बदलने की क्षमता रखती है।

समर्थन को लेकर तेज राजनीतिक हलचल

नतीजों के बाद से ही भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना सभी दलों की नजर एनसीपी (एसपी) पर टिकी है। सांगली में पार्टी के पार्षद अभिजीत कोली ने कहा कि एनसीपी (एसपी) महाविकास आघाड़ी के घटक के रूप में चुनाव लड़ी है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी सत्ता में रहे या विपक्ष में, विकास और जनहित के मुद्दों पर समझौता नहीं किया जाएगा।

स्थानीय गठबंधन का विकल्प भी खुला

अकोला को लेकर एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय स्तर पर गैर-राजनीतिक और विकास केंद्रित गठबंधन का विकल्प भी खुला है। उनका कहना है कि गठबंधन दल या चुनाव चिन्ह के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरतों और जनकल्याण को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

इन नतीजों के बाद भाजपा के सामने दो विकल्प हैं— या तो छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन जुटाए या फिर विपक्ष में बैठकर अगले चुनाव की रणनीति बनाए। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि भाजपा को सत्ता नहीं मिलती, तो यह परिणाम 2026 के आगे के चुनावों के लिए एक अहम संकेत साबित हो सकता है।

निष्कर्ष: सत्ता की चाबी शरद पवार के पाले में

कुल मिलाकर अकोला और सांगली नगर निगमों में सत्ता की चाबी फिलहाल एनसीपी (एसपी) के हाथ में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शरद पवार की पार्टी भाजपा का समर्थन करती है, महाविकास आघाड़ी के साथ रहती है या फिर कोई नया स्थानीय राजनीतिक समीकरण सामने आता है।

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