मुंबई, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी अस्मिता का मुद्दा हमेशा से हावी रहा है, लेकिन क्या यह 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी और अन्य नगर निकाय चुनावों में निर्णायक साबित होगा? मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सत्ता में बैठी ताकतें मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती हैं। क्या यह बयान चुनावी मुकाबले को धार देगा, या सिर्फ सियासी हलचल? राज और उद्धव ठाकरे के संयुक्त साक्षात्कार ने यह बहस छेड़ दी है कि मराठी मानुस की सुरक्षा और अधिकारों का सवाल कितना प्रभावी होगा। दोनों ठाकरे भाइयों की एकजुटता से शिवसेना (UBT) और मनसे का गठबंधन मजबूत हुआ है, जो भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है। लेकिन क्या मराठी अस्मिता का यह कार्ड चुनावी जीत की कुंजी बनेगा?
ठाकरे भाइयों का साझा हमला: भाजपा पर अलगाववाद का आरोप
‘सामना’ में प्रकाशित साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने के पुराने सपने को साकार करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर भाजपा नगर निकायों पर कब्जा कर लेती है, तो मराठी मानुस कुछ भी नहीं कर पाएगा। उद्धव ठाकरे ने भी भाजपा को आड़े हाथों लिया और कहा कि उनका विकास ‘विनाश’ की ओर ले जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग मराठी या महाराष्ट्र से जुड़े नहीं, बल्कि ठेकेदारों के लिए काम कर रहे हैं।
साक्षात्कार संजय राउत और महेश मांजरेकर ने लिया। राज ने कहा कि बाहर से आने वाले लोग सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र बना रहे हैं। क्या यह मराठी अस्मिता का पुराना जख्म है? संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन की तरह का माहौल बनाने की कोशिश से क्या चुनावी फायदा होगा?
मराठी अस्मिता का मुद्दा: कितना बड़ा सियासी हथियार?
मराठी अस्मिता महाराष्ट्र की राजनीति का मूल मंत्र रही है। शिवसेना की स्थापना से ही यह मुद्दा केंद्र में रहा। लेकिन क्या 2026 में यह कारगर होगा? राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक जैसे निकायों को नियंत्रित करना जरूरी है। क्या यह गठबंधन भाजपा को रोक पाएगा? उद्धव ने सरकार को ‘अनियोजित विकास’ का दोषी बताया। क्या मराठी मानुस का सवाल चुनावी जीत दिलाएगा?
मादक पदार्थों का खतरा: राज्य सरकार पर सवाल
राज ठाकरे ने मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राजनीति में धन और नशीली दवाओं का संबंध है। छापे बंद हो गए, तस्करी पर नियंत्रण नहीं। क्या यह चुनावी मुद्दा बनेगा?\
सरकार के प्रयास: विकास की दिशा में कदम
महाराष्ट्र सरकार विकास पर फोकस कर रही है। भाजपा का कहना है कि उनका विकास योजनाबद्ध है, जो जनता के हित में है। नगर निकायों में सुधार और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
चुनाव में मराठी अस्मिता का प्रभाव
ठाकरे भाइयों का गठबंधन और मराठी अस्मिता का मुद्दा बीएमसी चुनाव को रोचक बना रहा है। क्या यह भाजपा को रोक पाएगा? मराठी मानुस का सवाल चुनावी जीत का फैक्टर बनेगा या नहीं, समय बताएगा। लेकिन यह बहस महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा देगी। जनता के हित में सभी दलों को विकास और एकता पर फोकस करना चाहिए।
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