मुंबई, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता
मुंबई महानगरपालिका (BMC) में महापौर पद को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच रस्साकशी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के बहाने एक साल के लिए महापौर पद की मांग पर अड़े हैं। वहीं, भाजपा नेतृत्व ने इस पर फैसला दिल्ली में लेने का संकेत दिया है।
दिल्ली में भाजपा-शिवसेना नेताओं की बैठक
मंगलवार को महाराष्ट्र के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंचे। इनमें भाजपा के आशीष शेलार और अमित साटम के साथ शिंदे गुट के सांसद राहुल शेवाले भी शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की संभावना है। इससे पहले महाराष्ट्र सदन में दोनों दलों की एक अहम बैठक होगी। इस बैठक में बीएमसी की चार महत्वपूर्ण समितियों — स्थायी समिति, सुधार समिति, शिक्षण समिति और बेस्ट समिति — के अध्यक्ष पदों को लेकर भी चर्चा होगी।
शिंदे बोले — “बालासाहेब की शताब्दी पर शिवसेना का मेयर जरूरी”
शिवसेना नेता के अनुसार, एकनाथ शिंदे का कहना है कि बालासाहेब ठाकरे के शताब्दी वर्ष में शिवसेना का मेयर होना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से कहा कि यह न केवल प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) पर भी राजनीतिक दबाव बनेगा। शिंदे गुट का तर्क है कि इस कदम से शिवसैनिकों में नया उत्साह पैदा होगा और पार्टी अपनी पुरानी पहचान को फिर से मजबूत कर सकेगी।
25 जनवरी को हो सकती है फडणवीस-शिंदे बैठक
शिवसेना के एक पदाधिकारी ने बताया कि महापौर पद और समितियों के अध्यक्ष पदों पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद लिया जाएगा। संभावना है कि 25 जनवरी को फडणवीस और शिंदे की बैठक में इस पर निर्णय हो। 227 सदस्यों वाली बीएमसी में भाजपा के पास 89 पार्षद हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना के 29 पार्षद हैं। ऐसे में महापौर पद पर सहमति बनना दोनों दलों के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है।
शिवसेना पार्षदों ने छोड़ा बांद्रा का पांच सितारा होटल
इस बीच, शिंदे गुट की शिवसेना के सभी 29 पार्षद बांद्रा स्थित एक पांच सितारा होटल से बाहर निकल आए हैं। बताया जा रहा है कि सभी पार्षदों ने कोंकण डिविजनल कमिश्नर के पास खुद को एक समूह के रूप में पंजीकृत कराया है, जो बीएमसी चुनाव के बाद की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्षद 16 जनवरी को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से उसी होटल में ठहरे थे।
- शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे की शताब्दी पर एक साल के लिए महापौर पद की मांग की।
- भाजपा और शिवसेना नेताओं की बैठक दिल्ली में, शाह से मुलाकात की संभावना।
- बीएमसी की चार प्रमुख समितियों के अध्यक्ष पद पर भी होगा फैसला।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव के बाद सत्ता संतुलन को लेकर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। दोनों दलों की कोशिश है कि बीएमसी पर नियंत्रण बनाए रखते हुए आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले अपना जनाधार मजबूत किया जाए। अब सबकी निगाहें दिल्ली बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मुंबई का नया महापौर आखिर किस दल का होगा।




