मुंबई, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने दोपहर 2 बजे तक के रुझानों में 75 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाई है। यह प्रदर्शन मुस्लिम-बहुल और दलित-बहुल शहरी इलाकों में पार्टी की बढ़ती पकड़ को दर्शाता है। मुंबई BMC में AIMIM ने 2-9 सीटें जीती हैं, जबकि नांदेड़ में पार्टी 14 सीटों पर आगे चल रही है। मालेगांव में तो AIMIM 20 सीटों के साथ नंबर 1 पर है।
यह उभार कांग्रेस और शरद पवार की NCP के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि इन पार्टियों के परंपरागत वोट बैंक में AIMIM ने सेंध लगाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सफलता AIMIM को महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक नई पहचान दे सकती है और आने वाले विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
AIMIM का सबसे मजबूत प्रदर्शन कहां?
| शहर/नगर निगम | AIMIM की स्थिति (रुझान/जीत) | अन्य पार्टियां (रुझान) |
|---|---|---|
| मालेगांव | 20 सीटों पर नंबर 1 | शिवसेना 18, समाजवादी पार्टी 6 |
| नांदेड़ | 14 सीटों पर आगे | – |
| मुंबई (BMC) | 2-9 सीटें जीती | महायुति 119+ (बहुमत) |
| औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) | 24 सीटें जीती | – |
| अमरावती | 6 सीटें जीती | – |
| परभानी | 1 सीट जीती | – |
BMC में महायुति (BJP + शिंदे गुट) ने 119 वार्डों पर बढ़त बनाई है। BJP अकेले 88-98 वार्डों पर आगे है, जबकि शिंदे गुट 31 पर। बहुमत का आंकड़ा 114 है, और रुझानों से साफ है कि BJP पहली बार BMC में बहुमत हासیل कर रही है। 2017 में BJP को 82 और उद्धव शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार ठाकरे गुट (UBT) 64 और MNS 6 पर सिमटता नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महायुति ने विकास, बुनियादी सुविधाएं और शहर की साफ-सफाई जैसे मुद्दों पर फोकस किया। एग्जिट पोल्स ने भी महायुति की स्पष्ट जीत का अनुमान लगाया था, जिसमें JVC ने 138 वार्डों का अनुमान दिया था।
मतदान और अन्य महानगरपालिकाओं के रुझान
BMC चुनाव में 52.94% मतदान हुआ। अन्य प्रमुख महानगरपालिकाओं में मतदान प्रतिशत इस प्रकार रहा:
- छत्रपति संभाजीनगर: 59.82%
- पिंपरी-चिंचवड: 57.71%
- नवी मुंबई: 57.15%
- वसई-विरार: 57.12%
- ठाणे: 55.59%
- पुणे: 52.42%
- नागपुर: 51%
- मीरा-भाईंदर: 48.64%
- कल्याण-डोंबिवली: 45%
इनमें से अधिकांश में महायुति आगे चल रही है।
ठाकरे भाइयों का किला ढहने के कारण
25 सालों से BMC पर शिवसेना (अविभाजित) का कब्जा था, लेकिन इस बार उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियां अलग-अलग लड़ीं। महायुति ने विकास, बुनियादी सुविधाएं और शहर की साफ-सफाई जैसे मुद्दों पर फोकस किया, जिससे मतदाताओं का रुझान उनकी ओर हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि उद्धव की ‘बड़ी गलती’ राज से हाथ मिलाना था, जिससे मराठी अस्मिता का मुद्दा कमजोर पड़ा।
निष्कर्ष: महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में नया समीकरण
महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की शहरी राजनीति अब पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी, विविध और अनिश्चित हो गई है। महायुति की भारी जीत, AIMIM का उभार और उद्धव-राज ठाकरे के गठबंधन की कमजोर पकड़—ये तीन संकेत आने वाले महीनों में राज्य की सत्ता राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। AIMIM की 75+ सीटों की बढ़त से कांग्रेस-NCP को अपने मुस्लिम-दलित वोट बैंक पर फिर से सोचने की जरूरत पड़ गई है। मुंबई से लेकर विदर्भ तक महायुति का दबदबा बढ़ रहा है।




