कोलकाता, 31 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम समय शेष रह गया है, जिसके चलते राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा ने युवाओं को केंद्र में रखकर अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी इस बार रोजगार सृजन को प्रमुख मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतर रही है।
पार्टी का मानना है कि पिछले चुनावों में युवा मतदाता उससे दूर हो गए थे, ऐसे में इस बार उन्हें फिर से जोड़ना आवश्यक है। सीपीआई(एम) के केंद्रीय समिति सदस्य सामिक लाहिरी ने बताया कि पार्टी ने बड़ी संख्या में युवा उम्मीदवारों और स्वयंसेवकों को मैदान में उतारा है। उनका कहना है कि चुनाव में युवाओं की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
रोजगार नीति पर विशेष जोर
वाम मोर्चा राज्य में रोजगार की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। पार्टी का दावा है कि रोजगार के अभाव में लगभग 1.25 करोड़ लोगों को राज्य छोड़ना पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी ने एक वैकल्पिक रोजगार नीति तैयार की है, जिसे जल्द ही अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया जाएगा।
पार्टी का स्पष्ट कहना है कि इस चुनाव में उसका मुख्य फोकस नौकरी सृजन पर रहेगा और इसी आधार पर वह जनता के बीच जाएगी।
224 सीटों पर उम्मीदवार घोषित
विधानसभा की कुल 294 सीटों में से वाम मोर्चा ने अब तक 224 क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके सहयोगी दल भी अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। सभी प्रत्याशी स्थानीय स्तर पर घर-घर जाकर प्रचार में जुटे हुए हैं और मतदाताओं से सीधे संपर्क साध रहे हैं।
छोटी बैठकों और डिजिटल माध्यम पर फोकस
पार्टी इस बार बड़े-बड़े जनसभाओं के बजाय छोटे स्तर की बैठकों और व्यक्तिगत संवाद पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसके साथ ही सामाजिक माध्यमों का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है, ताकि युवा वर्ग तक आसानी से पहुंच बनाई जा सके।
पार्टी के स्वयंसेवक बिना किसी पारिश्रमिक के प्रचार सामग्री तैयार कर रहे हैं और इसे विभिन्न माध्यमों से प्रसारित कर रहे हैं।
प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरा
सीपीआई(एम) के केंद्रीय समिति सदस्य सुझन चक्रवर्ती ने राज्य में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और कानून-व्यवस्था को प्रमुख समस्याएं बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के दौरान इन क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ी है और वाम मोर्चा इन मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगा।
गौरतलब है कि वाम मोर्चा का जनाधार पिछले वर्षों में काफी घटा है। वर्ष 2011 में जहां उसे 39 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं 2021 में यह घटकर 4.73 प्रतिशत रह गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन सीमित रहा।
अब पार्टी व्यक्तिगत संपर्क और मोहल्ला बैठकों के जरिए मतदाताओं को फिर से अपने पक्ष में लाने का प्रयास कर रही है। जानकारी के अनुसार, राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।



