दिल्ली विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता और ब्रिटेन की डिप्टी स्पीकर नुसरत ग़नी की मुलाकात: e-Vidhan प्रणाली, सौर ऊर्जा और लोकतांत्रिक साझेदारी पर चर्चा

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को यूनाइटेड किंगडम की हाउस ऑफ कॉमन्स की डिप्टी स्पीकर नुसरत ग़नी (Nusrat Ghani) और उनके प्रतिनिधिमंडल से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान दोनों लोकतांत्रिक संस्थानों के बीच साझेदारी, पारस्परिक मूल्यों और डिजिटल नवाचारों पर गहन चर्चा हुई।

🏛️ लोकतांत्रिक मूल्यों की साझी विरासत

विजेंद्र गुप्ता ने प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत कराया और बताया कि कैसे यह संस्था स्वतंत्र भारत में जनप्रतिनिधित्व और लोकतंत्र का प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन दोनों की लोकतांत्रिक परंपराएं, कानूनों का पालन और संसदीय प्रक्रियाएं आपसी सहयोग का आधार रही हैं।

💻 e-Vidhan प्रणाली से कागज़रहित कार्यप्रणाली

गुप्ता ने बताया कि दिल्ली विधानसभा ने NeVA (National e-Vidhan Application) के माध्यम से पूरी तरह पेपरलेस वर्कफ्लो अपनाया है। इससे कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है, साथ ही विधानसभा की कार्यवाही अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत हुई है।

e-Vidhan प्रणाली के तहत सभी सदस्यों को डिजिटल उपकरण दिए गए हैं, जिससे प्रस्ताव, प्रश्नोत्तर, और विधेयक अब इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

☀️ 500 KW सौर ऊर्जा संयंत्र की शुरुआत

दिल्ली विधानसभा में हाल ही में 500 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की गई है, जो न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का परिचायक है, बल्कि सतत विकास की दिशा में एक ठोस कदम भी है।

विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि यह पहल ग्रीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में विधानसभा की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

🤝 भारत-ब्रिटेन साझेदारी पर चर्चा

बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा की। गुप्ता ने कहा कि आधुनिक समय में यह साझेदारी सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी नवाचार, प्रशासनिक पारदर्शिता और संसदीय सुधारों तक विस्तृत हो चुकी है।

नुसरत ग़नी ने दिल्ली विधानसभा की डिजिटल उपलब्धियों और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की और दोनों देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान को और अधिक बढ़ाने की इच्छा जताई।

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