Wednesday, January 14, 2026
व्हाट्सएप पर हमसे जुड़ें

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का शानदार आगाज: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत मंडपम में किया उद्घाटन, थीम पर जोर – ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य और विवेक @ 75’

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता 

भारत मंडपम में आज राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने मेला का दीप प्रज्ज्वलित कर औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर कतर के संस्कृति मंत्री HE Abdulrahman Bin Hamad Bin Jassim Bin Al Thani, स्पेन के संस्कृति मंत्री HE Ernest Urtasun Domènech सहित कई देशों के विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। विश्व का सबसे बड़ा B2C पुस्तक मेला इस वर्ष थीम ‘पढ़िए, सोचिए, बदलिए’ के साथ-साथ विशेष फोकस ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य और विवेक @ 75’ पर केंद्रित है। यह आयोजन न केवल साहित्य का महाकुंभ है, बल्कि भारत की समृद्ध सैन्य विरासत, स्वतंत्रता संग्राम और बहुभाषी संस्कृति का उत्सव भी है।

शिक्षा मंत्री का संबोधन: पुस्तकें राष्ट्र निर्माण का आधार

शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “पुस्तकें सभ्यता की आत्मा हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत हम पढ़ने की संस्कृति को जनआंदोलन बना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ज्ञान और विचार सबसे मजबूत स्तंभ हैं। यह मेला नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा कि पढ़कर सोचें, सोचकर बदलें और बदलकर राष्ट्र का निर्माण करें।”

मंत्री ने इस वर्ष कतर और स्पेन जैसे देशों की सहभागिता को विशेष महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक सांस्कृतिक संवाद और भारत की साहित्यिक विरासत का सुंदर संगम है।

विशेष उपलब्धि: ‘कुडोपाली की गाथा’ पुस्तक का 13 भाषाओं में विमोचन

मेले के उद्घाटन के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला, जब संबलपुर की भूमि पर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए वीर सुरेंद्र साईं और कुडोपाली के शहीदों की अनसुनी गाथा पर आधारित पुस्तक “कुडोपाली की गाथा: 1857 की अनसुनी कहानी” का अनुवाद बंगाली, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम, उर्दू समेत 9 भारतीय भाषाओं तथा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा (स्पेनिश) में विमोचित किया गया। यह पुस्तक पहले से ही हिंदी, अंग्रेजी और ओड़िया में उपलब्ध है। अब यह कुल 13 भाषाओं में पाठकों के लिए सुलभ हो गई है।

यह प्रयास भारत की बहुभाषी विरासत को मजबूत करने और स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय कदम है।

मेला की खास बातें और आकर्षण

  • अवधि: 10 से 18 जनवरी 2026 तक
  • स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली
  • प्रमुख आकर्षण:
    • 30+ देशों के 1000+ प्रकाशक
    • 25 लाख से अधिक पुस्तक प्रेमी की उम्मीद
    • 15+ साहित्यिक सत्र, लेखक परिचर्चा, कवि सम्मेलन
    • बच्चों के लिए विशेष कहानी कक्ष और गतिविधियां
    • अनुवाद साहित्य पर केंद्रित सेमिनार
    • ई-बुक और डिजिटल प्रकाशन पर प्रदर्शनी
    • ‘भारत की भाषाएं – एकता में विविधता’ विशेष प्रदर्शनी

निष्कर्ष: ज्ञान, संस्कृति और परिवर्तन का महाकुंभ

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 ज्ञान, विचार और सामाजिक परिवर्तन का अनूठा संगम है। शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के उद्घाटन से इस मेले को नई ऊर्जा मिली है। कतर और स्पेन की सहभागिता तथा ‘कुडोपाली की गाथा’ जैसी पुस्तक का बहुभाषी विमोचन इस आयोजन को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर और भी महत्वपूर्ण बनाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में पढ़ने की संस्कृति एक जनआंदोलन बन चुकी है। यह मेला नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा कि वे पढ़ें, सोचें और बदलाव लाएं। सभी पुस्तक प्रेमी, छात्र-छात्राएं और साहित्यकारों के लिए यह सुनहरा अवसर है।

हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें

ये भी पढ़ें: नोबेल शांति पुरस्कार ट्रांसफर विवाद: मारिया कोरिना मचाडो के बयान पर नोबेल कमेटी का साफ इनकार, ट्रंप का उत्साह – क्या है पूरा मामला?

Author

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest

More articles