भावुक माहौल में दी गई अंतिम विदाई
नई दिल्ली, 26 मार्च (वेब वार्ता)। दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित मुक्तिधाम में बुधवार सुबह एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला, जब इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान न केवल परिजन, बल्कि अंतिम संस्कार कराने वाले लोग भी भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखों में आंसू नजर आए।
परिजनों का दर्द देख हर कोई हुआ भावुक
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का पार्थिव शरीर सुबह करीब 8:40 बजे श्मशान घाट लाया गया। एंबुलेंस के पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। माता-पिता की आंखों से बहते आंसू उस लंबे दर्द की कहानी कह रहे थे, जो उनका बेटा पिछले 13 वर्षों से झेल रहा था। मां निर्मला का रो-रोकर बुरा हाल था।
पिता ने जोड़े हाथ, कहा- रोइए मत
इस मुश्किल घड़ी में भी पिता अशोक राणा ने खुद को संभालते हुए वहां मौजूद लोगों से हाथ जोड़कर कहा कि आप सब रोइए मत, बेटे को शांति से जाने दीजिए। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और माहौल और भी भावुक हो गया।
भाई ने दी मुखाग्नि, गूंज उठीं सिसकियां
करीब 9:45 बजे छोटे भाई आशीष राणा ने कांपते हाथों से अपने बड़े भाई को अंतिम प्रणाम किया और मुखाग्नि दी। उस पल की खामोशी और सिसकियां एक ऐसे दर्द को बयां कर रही थीं, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
13 साल के दर्द का हुआ अंत
अंतिम संस्कार में मौजूद विजय कुमार पांडेय ने बताया कि उन्होंने हरीश की कहानी पहले सोशल मीडिया पर पढ़ी थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि 13 साल के दर्द का अंत है।
सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
अवधेश कुमार पांडे के अनुसार, सुबह करीब 8:40 बजे हरीश राणा को श्मशान घाट लाया गया, जहां उनके माता-पिता और भाई मौजूद थे। सभी की आंखें नम थीं और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।



