नई दिल्ली, क्राइम वार्ता | वेब वार्ता
दिल्ली पुलिस ने एक त्वरित और सुनियोजित कार्रवाई में ई-कॉमर्स चोरी से जुड़े बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 152 ब्रांडेड लेडीज पर्स बरामद किए हैं और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नबी करीम थाना क्षेत्र में की गई, जिसमें फ्लिपकार्ट के दो पिकअप बॉय भी शामिल पाए गए। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और डिकॉय ग्राहक रणनीति के जरिए महज 12 घंटे के भीतर इस मामले का खुलासा किया।
वेयरहाउस से शुरू हुई चोरी की जांच
यह मामला तब सामने आया जब एक वेयरहाउस संचालक ने लगातार हो रही चोरी की शिकायत दर्ज कराई। 6 फरवरी 2026 को ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान सोशल मीडिया पर बेहद कम दामों में बिक रहे ‘एक्जोटिक’ ब्रांड के पर्स संदिग्ध पाए गए।
पुलिस टीम ने इन खातों की तकनीकी जांच की और गिरोह को पकड़ने के लिए 50 पर्स का डिकॉय ऑर्डर दिया, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया।
बरामद सामान और कार्रवाई का विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बरामद पर्स | 152 (एक्जोटिक ब्रांड) |
| अनुमानित मूल्य | लगभग ₹4 लाख |
| गिरफ्तार आरोपी | 3 |
| एफआईआर की तिथि | 6 फरवरी 2026 |
| गिरफ्तारी में समय | 12 घंटे के भीतर |
- सोशल मीडिया के जरिए कम कीमत पर बेचा जा रहा था सामान
- डिकॉय ऑर्डर से आरोपी रंगे हाथ पकड़े गए
- अंतरिम सप्लाई चैन को किया गया ध्वस्त
कैसे काम करता था चोरी का नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि फ्लिपकार्ट के दो पिकअप कर्मचारी हर डिलीवरी से 2 से 3 पर्स चुरा लेते थे। इसके अलावा रद्द किए गए ऑर्डरों से भी सामान निकाल लिया जाता था। यह चोरी का माल एक रिसीवर तक पहुंचाया जाता, जो स्थानीय बाजारों में बेचकर नकद पैसा हासिल करता था।
इस तरह एक संगठित तरीके से अंदरूनी चोरी कर लंबे समय से नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
डीसीपी का बयान और पुलिस की भूमिका
सेंट्रल जिला डीसीपी अनंत मित्तल ने कहा कि यह मामला स्मार्ट प्लानिंग और तकनीकी निगरानी के माध्यम से सुलझाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस अभियान में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर गुलशन नागपाल की भूमिका को भी सराहा गया है।
ई-कॉमर्स सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
यह मामला ई-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ती अंदरूनी चोरी की समस्या को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज डिलीवरी सिस्टम के बीच ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों को नुकसान होता है।
पुलिस ने ई-कॉमर्स कंपनियों से आंतरिक ऑडिट और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की अपील की है।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि तकनीक और रणनीति के सही उपयोग से संगठित आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। ई-कॉमर्स चोरी गिरोह के इस भंडाफोड़ से न केवल एक नेटवर्क टूटा है, बल्कि ऑनलाइन व्यापार प्रणाली में भरोसे को भी मजबूती मिली है।
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