हरित दिल्ली के लिए 22,236 करोड़ आवंटित, 17 विभागों को जिम्मेदारी

नई दिल्ली, 05 अप्रैल (वेब वार्ता)। राजधानी में वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए व्यापक ‘हरित बजट’ लागू किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बजट के तहत कुल 22,236 करोड़ रुपये 17 विभागों को आवंटित किए हैं, जो राज्य के कुल बजट का 21.44 प्रतिशत है।

सरकार का कहना है कि यह पहल केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘स्वच्छ दिल्ली, हरित दिल्ली’ के लक्ष्य को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ठोस रणनीति है।

जल और परिवहन पर सबसे अधिक फोकस

मुख्यमंत्री के अनुसार, हरित बजट का सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली जल बोर्ड को दिया गया है। करीब 6,485 करोड़ रुपये यमुना की सफाई और जल उपचार परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।

इसके अलावा परिवहन विभाग को 4,758 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनका उपयोग विद्युत बसों को बढ़ावा देने और स्वच्छ परिवहन प्रणाली विकसित करने में किया जाएगा।

बुनियादी ढांचा और योजना निर्माण पर जोर

लोक निर्माण विभाग को 3,350 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनसे धूल नियंत्रण और हरित बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। वहीं, योजना विभाग को 2,350 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे विभिन्न पर्यावरणीय परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

शहरी विकास विभाग और डूसिब को मिलाकर 2,273 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनका उपयोग विशेष पर्यावरणीय अभियानों में किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण

बिजली विभाग को 1,410 करोड़ रुपये सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए दिए गए हैं। पर्यावरण विभाग को 558 करोड़ रुपये प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं।

इसके अलावा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को 305 करोड़ रुपये, विकास विभाग को 258 करोड़ रुपये और वन विभाग को 181 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे कार्यों को गति मिलेगी।

शिक्षा, पर्यटन और उद्योग भी शामिल

सरकार ने शिक्षा, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों को भी हरित पहल से जोड़ा है। शिक्षा विभाग को विद्यालयों में पर्यावरणीय गतिविधियों के लिए 100 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग को पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के लिए 102 करोड़ रुपये और उद्योग विभाग को प्रदूषण नियंत्रण के लिए 42 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधान नहीं, बल्कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से लड़ने का एक समग्र दृष्टिकोण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बन चुका है।

सरकार का मानना है कि इस ‘हरित बजट’ के माध्यम से न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, बल्कि राजधानी को एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

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