Ashtalakshmi Youth Exchange Program: दिल्ली में बैठकर गरीबी का अहसास संभव नहीं – प्रो. योगेश सिंह

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नई दिल्ली, शिक्षा डेस्क | वेब वार्ता

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा है कि केवल राजधानी में बैठकर देश की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को पूरी तरह समझना संभव नहीं है। Ashtalakshmi Youth Exchange Program के तहत आईआईएम शिलांग (मेघालय) से लौटे दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में जमीनी स्तर पर जाकर ही गरीबी और विकास की वास्तविक स्थिति को समझा जा सकता है।

इस अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में कुलपति ने विद्यार्थियों के अनुभवों को ध्यानपूर्वक सुना और उनसे सुझाव भी आमंत्रित किए। उन्होंने कहा कि Ashtalakshmi Youth Exchange Program जैसे कार्यक्रम युवाओं को देश के अलग-अलग हिस्सों की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)

  • डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने विद्यार्थियों से किया संवाद
  • अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम से लौटे छात्रों से चर्चा
  • गरीबी और विकास को समझने के लिए जमीनी अनुभव जरूरी
  • विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर विद्यार्थियों से विचार साझा

Ashtalakshmi Youth Exchange Program के अनुभव साझा

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने मेघालय में अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस कार्यक्रम ने उन्हें देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की संस्कृति, समाज और विकास से जुड़े मुद्दों को समझने का अवसर दिया। Ashtalakshmi Youth Exchange Program का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समझ और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ऐसे अनुभव युवाओं को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं और उन्हें देश की वास्तविकताओं से जोड़ते हैं।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर चर्चा

प्रो. योगेश सिंह ने विद्यार्थियों से “विकसित भारत 2047” के संकल्प को लेकर उनके विचार भी सुने। उन्होंने कहा कि आने वाले दो दशकों तक भारत को आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करना होगा।

उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था आज तेजी से बढ़ रही है। आजादी के लगभग 60 वर्षों बाद भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग एक ट्रिलियन डॉलर था, जो 2025 तक बढ़कर लगभग चार ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि Ashtalakshmi Youth Exchange Program जैसे कार्यक्रम युवाओं को देश के विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।

25 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

कुलपति ने कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करना है। इसके लिए आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता भी आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे सभी “विकसित भारत के एम्बेसडर” हैं और उन्हें देश के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए। Ashtalakshmi Youth Exchange Program जैसे कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं।

कार्यक्रम की प्रमुख झलकियांछात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम का नौवां बैच 1 से 14 फरवरी 2026 तक आईआईएम शिलांग (मेघालय) में आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के 20 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जो भारत के 15 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित हैं।

शैक्षणिक और संस्थागत भ्रमण से मिला अनुभव

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने आईआईएम शिलांग और नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU) में विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में हिस्सा लिया। इन सत्रों में कैट परीक्षा की तैयारी, उत्तर-पूर्व भारत की भौगोलिक विशेषताएं, जैव विविधता, पर्यटन संभावनाएं और क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

इसके अलावा प्रतिभागियों ने कई महत्वपूर्ण संस्थानों का भ्रमण भी किया, जिनमें ईस्टर्न एयर कमांड, नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल, आईसीसीआर शिलांग, लोक भवन और आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इन भ्रमणों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशासन, रक्षा और अनुसंधान से जुड़े कार्यों के बारे में जानकारी मिली।

अब आगे क्या होगा?विशेषज्ञों का मानना है कि Ashtalakshmi Youth Exchange Program जैसे कार्यक्रम देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, समाज और विकास से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे राष्ट्रीय एकता और आपसी समझ को भी मजबूती मिलती है।

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