केजरीवाल 6 मार्च को विशेषाधिकार समिति के सामने होंगे पेश, फांसीघर विवाद पर सुनवाई

नई दिल्ली, 03 मार्च | वेब वार्ता

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे 6 मार्च को समन के अनुसार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे। यह मामला दिल्ली विधानसभा परिसर में कथित ‘फांसीघर’ के दावे से जुड़े विवाद से संबंधित है, जिसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। होली के अगले दिन निर्धारित इस सुनवाई पर राजनीतिक हलकों की नजर टिकी हुई है।

समिति को पत्र, कार्यवाही के लाइव प्रसारण की मांग

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने विशेषाधिकार समिति को पत्र भेज दिया है और वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित होंगे। उन्होंने पारदर्शिता की मांग करते हुए कार्यवाही का सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) कराने की अपील भी की है।

पत्र में केजरीवाल ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजधानी प्रदूषण, टूटी सड़कों, कूड़े के ढेर और अस्पतालों में दवाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार ठोस कार्रवाई नहीं कर रही।

क्या है ‘फांसीघर’ विवाद?

तारीख / घटनाविवरण
9 अगस्त 2022तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक कक्ष का उद्घाटन ‘फांसीघर’ के रूप में किया
2011 मानचित्रविधानसभा अध्यक्ष के अनुसार कक्ष ‘टिफिन रूम’ के रूप में दर्ज
फरवरी 2026समिति ने अंतिम समन जारी कर 6 मार्च की तिथि तय की

उल्लेखनीय है कि 9 अगस्त 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ब्रिटिश कालीन विधानसभा भवन के एक कमरे को ‘फांसीघर’ के रूप में प्रस्तुत किया था। पिछले वर्ष भाजपा के सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा विधानसभा में उठाया गया।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दावा किया कि जिस कक्ष को ‘फांसीघर’ बताया गया, वह वास्तुशिल्प डिजाइन के 2011 के मानचित्र के अनुसार भोजन वितरण हेतु ‘टिफिन रूम’ था।

  • केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और राखी बिरला को जारी हुआ था समन
  • पूर्व में पेश न होने पर समिति ने दिया था अंतिम अवसर
  • 6 मार्च को निर्धारित सुनवाई पर राजनीतिक सरगर्मी तेज

राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही को संवैधानिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस प्रकरण में तथ्यों की पुष्टि और दावों की सत्यता पर स्पष्टता आने की संभावना है। साथ ही, यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के संदर्भ में अहम बन गया है।

निष्कर्ष

6 मार्च को होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि ‘फांसीघर’ विवाद में तथ्यों की स्थिति क्या है। केजरीवाल की उपस्थिति और लाइव प्रसारण की मांग ने इस मामले को और अधिक पारदर्शिता तथा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर समिति की आगामी कार्यवाही पर टिकी है।


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