Friday, February 27, 2026
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रैली से संपत्ति क्षति पर जमानत राशि अनिवार्य: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को दिशानिर्देश बनाने के दिए निर्देश

चेन्नई, (वेब वार्ता)। तमिलनाडु में राजनीतिक रैलियों और सभाओं के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह राजनीतिक दलों से सार्वजनिक सभाओं या रैलियों के लिए जमा सुरक्षा राशि (जमानत) वसूलने के स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करे। इस राशि का उपयोग पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। जस्टिस एन. सतीश कुमार ने अतिरिक्त लोक अभियोजक ई. राज तिलक को 24 सितंबर तक इन दिशानिर्देशों की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।

यह फैसला अभिनेता सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कझागम (TVK) की याचिका पर अंतरिम आदेश के रूप में आया, जिसमें चुनाव प्रचार के लिए अनुमति में भेदभाव का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने कहा कि कोई भी दल कानून से ऊपर नहीं है, और सभी दलों पर एक समान नियम लागू होंगे। यह कदम राजनीतिक आयोजनों के दौरान होने वाली तोड़फोड़ और क्षति की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

कोर्ट का तर्क: संपत्ति क्षति की भरपाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें जरूरी

जस्टिस कुमार ने फैसले में कहा कि तमिलनाडु संपत्ति (क्षति और हानि निवारण) अधिनियम, 1992 मूल रूप से सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन 1994 के संशोधन से निजी संपत्ति को भी इसके दायरे में लाया गया। फिर भी, हाल के वर्षों में इसका सही पालन नहीं हो रहा, जिससे प्रभावित लोग मुआवजा नहीं पा पाते। कोर्ट ने लिखा, “राजनीतिक दलों या अन्य समूहों को प्रदर्शन या जनसभाओं के दौरान सार्वजनिक/निजी संपत्ति क्षति के लिए जिम्मेदार ठहराना अधिनियम का मूल उद्देश्य है। ऐसे बड़े जमावड़ों में नुकसान की भरपाई के लिए सख्त शर्तें लगानी चाहिए, जिसमें जमानत राशि जमा करना अनिवार्य हो।”

कोर्ट ने यह टिप्पणियां TVK की तिरुचिरापल्ली रैली (13 सितंबर 2025) के दौरान कथित संपत्ति क्षति को ध्यान में रखते हुए कीं। पुलिस ने फोटो पेश कर दिखाया कि कार्यकर्ताओं ने संरचनाओं पर चढ़कर व्यवधान पैदा किया। जज ने कहा, “अगर कोई अप्रिय घटना हो जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?” यह फैसला सभी राजनीतिक दलों और संगठनों पर लागू होगा, जो सार्वजनिक सभाएं या जुलूस आयोजित करना चाहते हैं।

TVK की याचिका: पुलिस की 23 शर्तों पर सवाल, भेदभाव का आरोप

TVK ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस उसके चुनाव प्रचार अभियानों के लिए कठोर शर्तें लगा रही है, जो अन्य दलों पर लागू नहीं होतीं। वरिष्ठ वकील वी. राघवाचारी ने बताया कि तिरुचि पुलिस ने 13 सितंबर को विजय के अभियान के लिए 23 शर्तें लगाईं, जिनमें गर्भवती महिलाएं, वृद्ध और विकलांग व्यक्ति के भाग न लेने की शर्त शामिल थी। याचिका में कहा गया, “पार्टी किसी को अपने कार्यक्रम में आने से कैसे रोक सकती है? यह भेदभावपूर्ण है।”

TVK ने डीजीपी को निर्देश देने की मांग की कि राज्यभर में (20 सितंबर से 20 दिसंबर तक) अभियानों के लिए निष्पक्ष अनुमति दी जाए। कोर्ट ने स्वीकार किया कि कुछ शर्तें भेदभावपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के हित में नियम जरूरी हैं। TVK उप महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार ने याचिका दायर की थी।

दिशानिर्देशों की रूपरेखा: क्या हो सकता है शामिल?

कोर्ट के निर्देश के आधार पर सरकार द्वारा तैयार होने वाले दिशानिर्देशों में निम्नलिखित प्रावधान हो सकते हैं:

  • जमानत राशि: रैली के आकार के आधार पर राशि तय, जो क्षति की भरपाई के लिए जब्त हो सके।
  • सुरक्षा मूल्यांकन: आयोजन से पहले जोखिम आकलन और ट्रैफिक प्रबंधन योजना अनिवार्य।
  • समानता का सिद्धांत: सभी दलों पर एक समान नियम, बिना भेदभाव के।
  • मुआवजा तंत्र: क्षति का आकलन और वसूली के लिए समिति गठन।
  • दंड प्रावधान: नियम उल्लंघन पर जुर्माना या आयोजन रद्द करने की शक्ति।

यह कदम तमिलनाडु में राजनीतिक आयोजनों को अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संपत्ति क्षति की घटनाएं कम होंगी और लोकतंत्र की गरिमा बनी रहेगी।

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