नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
भारत में महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए किए जा रहे कानूनी और संस्थागत प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। Women Justice Initiatives India के तहत महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 70वें सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी जांच प्रणाली, कानूनी जागरूकता कार्यक्रम और पर्याप्त न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण सत्र में बोलते हुए सावित्री ठाकुर ने कहा कि Women Justice Initiatives India के अंतर्गत सरकार का उद्देश्य महिलाओं के लिए न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, प्रभावी और संवेदनशील बनाना है। इसके लिए देश में कई नई योजनाएं और न्यायिक पहल शुरू की गई हैं, जो महिलाओं को कानूनी सहायता और सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- संयुक्त राष्ट्र में सावित्री ठाकुर ने भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया
- महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करने पर जोर
- नारी अदालत और ग्राम न्यायालय जैसी पहलें शुरू
- टेली-लॉ कार्यक्रम से महिलाओं को कानूनी सलाह उपलब्ध
Women Justice Initiatives India: संयुक्त राष्ट्र में भारत का वक्तव्य
संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 70वें सत्र में भारत की ओर से बोलते हुए सावित्री ठाकुर ने कहा कि Women Justice Initiatives India के तहत सरकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच तंत्र, कानूनी जागरूकता और न्यायिक संस्थाओं की संख्या बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सरकार ने कई कानूनी सुधार और कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और न्यायपूर्ण वातावरण प्रदान करना है।
नारी अदालत और ग्राम न्यायालय जैसी पहलें
सावित्री ठाकुर ने बताया कि ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान के लिए नारी अदालत और ग्राम न्यायालय जैसी पहलें शुरू की गई हैं। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं से जुड़े मामलों को तेजी से और संवेदनशील तरीके से हल करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि Women Justice Initiatives India के तहत शुरू की गई ये पहलें जमीनी स्तर पर न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे महिलाओं को न्याय पाने के लिए लंबी और जटिल प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता कम हो रही है।
नए आपराधिक कानून और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण
राज्य मंत्री ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि भारत में हाल ही में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानून पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाना है।
उन्होंने कहा कि Women Justice Initiatives India के तहत न्यायिक प्रणाली में सुधार करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि महिलाओं को न्याय पाने में किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।
टेली-लॉ कार्यक्रम से मिल रही कानूनी सहायता
सावित्री ठाकुर ने बताया कि सरकार ने टेली-लॉ कार्यक्रम के माध्यम से देशभर में मुकदमे से पहले कानूनी सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इस कार्यक्रम के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को भी आसानी से कानूनी सहायता मिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार Women Justice Initiatives India के तहत यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए न्याय तक पहुंच को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और कमजोर वर्ग की महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और न्याय प्राप्त करने में मदद मिल रही है।
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