नई दिल्ली, इंटरनेशनल डेस्क | वेब वार्ता
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा न्यायिक झटका देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा का उल्लंघन किया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) राष्ट्रपति को मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
कोर्ट ने कांग्रेस की भूमिका पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि कांग्रेस राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने जैसी “विशिष्ट और असाधारण शक्ति” देना चाहती, तो वह इसे कानून में स्पष्ट रूप से दर्ज करती, जैसा कि अन्य टैरिफ कानूनों में किया गया है।
कोर्ट के अनुसार, IEEPA के तहत ऐसी व्यापक आर्थिक शक्तियां राष्ट्रपति को स्वतः प्राप्त नहीं होतीं।
ट्रंप ने कई देशों पर लगाए थे शुल्क
गौरतलब है कि सत्ता में वापसी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का उपयोग करते हुए लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नए शुल्क लगा दिए थे।
इनमें शामिल थे —
- रेसिप्रोकल टैरिफ
- मैक्सिको पर शुल्क
- कनाडा पर शुल्क
- चीन पर अतिरिक्त टैरिफ
इन टैरिफ को अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, आव्रजन और अनुचित व्यापार प्रथाओं से जोड़कर लागू किया गया था।
सेक्टर-विशिष्ट टैरिफ पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि कोर्ट के इस फैसले का असर स्टील, एल्युमिनियम और अन्य सेक्टर-विशिष्ट उत्पादों पर लगाए गए शुल्क पर नहीं पड़ेगा।
इन क्षेत्रों से संबंधित जांच प्रक्रियाएं अब भी जारी हैं और भविष्य में नए टैरिफ लगाए जाने की संभावना बनी हुई है।
निचली अदालतों के फैसलों की पुष्टि
यह फैसला निचली अदालतों के पहले के निर्णयों की भी पुष्टि करता है। मई 2025 में एक व्यापार अदालत ने IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराया था।
हालांकि सरकार की अपील के चलते उस फैसले पर अस्थायी रोक लगी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने इस विवाद पर अंतिम मुहर लगा दी है।
मुख्य बिंदुओं का सार
| विषय | विवरण |
|---|---|
| फैसला | टैरिफ को अवैध करार |
| बहुमत | 6-3 |
| कानून | IEEPA |
| प्रभावित देश | चीन, कनाडा, मैक्सिको सहित अन्य |
| सेक्टरल टैरिफ | अप्रभावित |
निष्कर्ष
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियों पर संवैधानिक सीमाओं को स्पष्ट करता है। इससे भविष्य में अमेरिकी व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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