नई दिल्ली, अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाने के उद्देश्य से शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम उस समय उठाया गया है, जब ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत हुई थी। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है।
ओमान में बातचीत के बाद बढ़ा दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ओमान में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत “काफी सकारात्मक” रही है। हालांकि, इन चर्चाओं के तुरंत बाद अमेरिका द्वारा नए प्रतिबंधों की घोषणा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ये प्रतिबंध सीधे तौर पर बातचीत से जुड़े हैं या नहीं।
शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई
नए प्रतिबंधों के तहत अमेरिका ने उन शिपिंग संस्थाओं और जहाजों को निशाने पर लिया है, जो ईरान के तेल और उससे जुड़े उत्पादों के परिवहन में शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि समुद्री मार्गों के जरिए ईरान बड़े पैमाने पर तेल निर्यात कर रहा था, जिससे उसे आर्थिक सहायता मिल रही थी।
- ईरान के तेल निर्यात से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध
- शिपिंग कंपनियों की गतिविधियों की निगरानी
- ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर संभावित टैरिफ
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बढ़ता अमेरिकी दबाव
कार्यकारी आदेश से बढ़ी वैश्विक चिंता
व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत उन देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से वस्तुएं या सेवाएं खरीदते हैं। आदेश में कहा गया है कि ऐसे देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका के नए प्रतिबंध और टैरिफ नीति से ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। साथ ही, इससे वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा सकता है और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।
ये भी पढ़ें: ईरान के सुप्रीम लीडर ने अमेरिका को दी चेतावनी, क्षेत्रीय युद्ध का किया दावा







