वॉशिंगटन/तेहरान, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने के आरोपों के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और उनसे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद ईरान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।
अमेरिकी ट्रेजरी का ऐलान, राष्ट्रपति के निर्देश पर कार्रवाई
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया कि ये प्रतिबंध राष्ट्रपति के निर्देश पर लगाए गए हैं। ट्रेजरी सचिव ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका स्वतंत्रता और न्याय की मांग कर रहे ईरानी नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा है। विभाग के अनुसार, जिन अधिकारियों को प्रतिबंधित किया गया है, उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को अंजाम दिया और तेल से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई को गुप्त तरीकों से इधर-उधर करने में भूमिका निभाई।
शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई
प्रतिबंधों की सूची में ईरान की सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी के सचिव अली लारीजानी का नाम भी शामिल है। अमेरिका का आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनों के दमन का समन्वय किया और सुरक्षा बलों को बल प्रयोग के निर्देश दिए। इसके अलावा, ईरान की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड के चार क्षेत्रीय कमांडरों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिन पर लोरेस्तान और फार्स प्रांतों में हिंसक कार्रवाई का नेतृत्व करने का आरोप है।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप
- फार्स और लोरेस्तान प्रांतों में दमनात्मक कार्रवाई
- तेल आय को गुप्त वित्तीय नेटवर्क के जरिए स्थानांतरित करने का आरोप
शैडो बैंकिंग नेटवर्क और तेल आय की हेराफेरी
ट्रेजरी विभाग ने 18 व्यक्तियों और संस्थाओं को भी नामित किया है, जिन पर शैडो बैंकिंग नेटवर्क चलाने का आरोप है। इन नेटवर्कों के जरिए ईरानी तेल बिक्री से होने वाली आय को संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम की फर्जी कंपनियों के माध्यम से सफेद किया जाता था। ट्रेजरी के अनुसार, ये नेटवर्क हर साल अरबों डॉलर की हेराफेरी करते रहे, जबकि ईरानी नागरिक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
फार्स और लोरेस्तान में हिंसा के गंभीर आरोप
अमेरिकी बयान में कहा गया है कि फार्स प्रांत में सुरक्षा बलों की कार्रवाई इतनी भीषण थी कि अस्पताल गोली लगने से घायल लोगों से भर गए और अन्य मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा सका। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इस दमन में हजारों लोग मारे गए या घायल हुए हैं, जबकि ईरान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
निष्कर्ष: अधिकतम दबाव नीति के तहत सख्त संदेश
अमेरिका की यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ ‘अधिकतम दबाव नीति’ का हिस्सा मानी जा रही है। ट्रेजरी विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक इस अभियान के तहत सैकड़ों व्यक्तियों, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि नए प्रतिबंध ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को और बढ़ाएंगे, हालांकि इससे क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका भी जताई जा रही है।
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