अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर वैश्विक प्रतिक्रिया, पाकिस्तान की भूमिका को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन

वाशिंगटन/तेहरान, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई देशों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। खासतौर पर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर ब्रिटेन और मलेशिया ने खुलकर सराहना की है।

पाकिस्तान की कूटनीति को मिली सराहना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्धविराम वार्ता में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका का उल्लेख किया।

पाकिस्तान में ब्रिटेन की उच्चायुक्त जेन मैरियट ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने शांत, प्रभावी और कूटनीतिक भूमिका निभाकर इस महत्वपूर्ण युद्धविराम को संभव बनाने में योगदान दिया है।

मलेशिया ने भी किया स्वागत

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तावित 10 सूत्रीय योजना और अमेरिका की सकारात्मक प्रतिक्रिया क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए शुभ संकेत है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल सद्भावना के साथ आगे बढ़ेगी और क्षेत्र में जारी संघर्षों का स्थायी समाधान खोजने में मदद करेगी।

व्यापक शांति समझौते की अपील

अनवर इब्राहिम ने कहा कि इस 10 सूत्रीय योजना को व्यापक शांति समझौते में बदलना आवश्यक है, जिससे न केवल ईरान बल्कि इराक, लेबनान और यमन जैसे देशों में भी स्थिरता स्थापित हो सके। उन्होंने गाजा में मानवीय संकट का भी उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिकों तक राहत पहुंचाने की अपील की।

ट्रंप का बयान और आगे की रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को व्यवहारिक बताते हुए कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान के बुनियादी ढांचे पर किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच वार्ता प्रस्तावित है।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने संभावित सैन्य कार्रवाई को इस शर्त पर रोका है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत हुआ है।

शांति प्रक्रिया पर टिकी उम्मीदें

जहां ईरान इस समझौते को अपनी कूटनीतिक जीत बता रहा है, वहीं अमेरिका इसे अपनी रणनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद है कि यह अस्थायी युद्धविराम स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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