तेहरान/वाशिंगटन, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। करीब 40 दिनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य संघर्ष पर फिलहाल विराम लग गया है। दोनों देशों के बीच 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत तेहरान अपनी शर्तों पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तैयार हो गया है। वहीं, व्हाइट हाउस ने इस पूरे अभियान को अपनी रणनीतिक जीत बताते हुए कहा है कि सैन्य दबाव ने कूटनीतिक वार्ता का मार्ग प्रशस्त किया है।
युद्धविराम की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है और इसके बंद होने से विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से बनी सहमति
समझौते से कुछ घंटे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो ईरान के पुल, बिजली संयंत्र और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अहम भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई।
ट्रंप ने अपने सामाजिक माध्यम पर इन दोनों नेताओं के प्रयासों का उल्लेख किया। वहीं शहबाज शरीफ ने 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में औपचारिक वार्ता की संभावना जताई है, जिससे आगे स्थायी समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
ईरान की शर्तों पर युद्धविराम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान पर हमले पूरी तरह बंद होते हैं तो उनकी सेना भी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगी। समझौते के अनुसार अगले दो सप्ताह तक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति होगी, लेकिन यह पूरी तरह ईरानी सेना के नियंत्रण और समन्वय में रहेगी।
ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजा है, जो आगामी वार्ता का आधार बनेगा।
ईरान का 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव
ईरान ने जिन प्रमुख शर्तों को रखा है, उनमें आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों से अमेरिकी सेना की वापसी और भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई से परहेज शामिल है। इसके अलावा तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता देने, हुए नुकसान की भरपाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से जुड़े सभी प्रतिबंधात्मक प्रस्तावों को खत्म किया जाए तथा क्षेत्र में सक्रिय संगठनों के साथ सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त किया जाए।
ट्रंप का बयान और आगे की राह
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान का प्रस्ताव वार्ता शुरू करने के लिए एक व्यावहारिक आधार प्रदान करता है। उन्होंने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा करते हुए उम्मीद जताई कि इससे स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति होगी।
वहीं ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बताया है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर 10 अप्रैल को प्रस्तावित इस्लामाबाद बैठक पर टिकी है, जहां इस अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश की जाएगी।



