नई दिल्ली, अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना का USS Abraham Lincoln Aircraft Carrier Strike Group मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। इसके बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य कदम की तैयारी में हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) और उसके साथ तैनात युद्धपोत क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से तैनात किए गए हैं। लेकिन मौजूदा हालात में इस तैनाती को केवल “रूटीन मिशन” मानना मुश्किल हो रहा है।
इंडो-पैसिफिक से हटाकर मिडिल ईस्ट क्यों?
अमेरिकी नौसेना ने साफ किया है कि यह स्ट्राइक ग्रुप पहले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात था, लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव के चलते इसे तत्काल मिडिल ईस्ट भेजा गया। 19 जनवरी को यह समूह मलक्का जलडमरूमध्य पार कर चुका था, जिसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि वॉशिंगटन तेहरान पर सैन्य दबाव बढ़ाना चाहता है।
ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति?
ईरान में हाल के महीनों में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार की सख्त कार्रवाई के बाद ट्रंप प्रशासन लगातार तेहरान को चेतावनी देता रहा है। ट्रंप ने पहले बयान दिया था कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई या दमन तेज हुआ तो सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि बाद में ट्रंप ने कहा था कि यह सैन्य जमावड़ा केवल एहतियाती कदम है। उन्होंने कहा, “हमारा एक विशाल बेड़ा उस दिशा में जा रहा है, हो सकता है कि हमें उसका इस्तेमाल न करना पड़े।” लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान भी साइकोलॉजिकल प्रेशर का हिस्सा है।
USS Abraham Lincoln Strike Group क्या है?
| घटक | विवरण |
|---|---|
| एयरक्राफ्ट कैरियर | USS Abraham Lincoln (CVN-72), परमाणु संचालित, 1 लाख टन से अधिक वजन |
| डिस्ट्रॉयर्स | 3-4 Arleigh Burke-class गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स |
| पनडुब्बियां | 1-2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (Virginia / Los Angeles-class) |
| सपोर्ट शिप | तेल, गोला-बारूद और लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज |
हमले की स्थिति में क्या होगा?
यदि ट्रंप प्रशासन ईरान पर हवाई या मिसाइल हमला करने का फैसला करता है, तो यह स्ट्राइक ग्रुप अमेरिका को कई विकल्प देता है—टोमाहॉक मिसाइल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और समुद्री घेराबंदी। वहीं ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि किसी भी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा, जिससे पूरा मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में झुलस सकता है।
निष्कर्ष
USS Abraham Lincoln की तैनाती केवल सैन्य मूवमेंट नहीं, बल्कि भूराजनीतिक संदेश भी है। सवाल यही है—क्या यह केवल दबाव की राजनीति है या वाकई ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमला करने के बेहद करीब पहुंच चुका है? आने वाले दिन मिडिल ईस्ट के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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