Tonga Earthquake: टोंगा के नेयाफू के पास 7.6 तीव्रता का भूकंप, सुनामी चेतावनी जारी

नेयाफू (टोंगा), अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

ओशनिया महाद्वीप के टोंगा क्षेत्र में मंगलवार (24 मार्च) को 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र नेयाफू के पास समुद्र के भीतर स्थित था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 9:37 बजे आया और इसकी गहराई 235 किलोमीटर से अधिक थी। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है, लेकिन भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई है।

गहरे समुद्र में आया भूकंप, नुकसान की खबर नहीं

प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप का केंद्र नेयाफू से करीब 153 किलोमीटर पश्चिम में दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित था। भूकंप की गहराई अधिक होने के कारण सतह पर इसका असर सीमित रहा, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान की संभावना कम हो गई।

भूकंप का विवरण

पैरामीटरविवरण
तीव्रता7.6
स्थाननेयाफू, टोंगा (दक्षिण प्रशांत महासागर)
गहराई235+ किलोमीटर
समयसुबह 9:37 (स्थानीय समय)

सुनामी को लेकर अलर्ट जारी

शक्तिशाली झटकों के बाद प्रशांत महासागर सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) ने क्षेत्र में सुनामी को लेकर चेतावनी जारी की है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप की अधिक गहराई के कारण सुनामी का खतरा सीमित हो सकता है, फिर भी तटीय इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है।

  • भूकंप गहरे समुद्र में आया
  • अब तक किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं
  • सुनामी को लेकर एहतियातन चेतावनी जारी

एक दिन पहले भी आए थे झटके

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी 23 मार्च को टोंगा के हिहिफो क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसकी गहराई करीब 79.7 किलोमीटर थी। लगातार आ रहे भूकंप इस क्षेत्र की सक्रिय भूकंपीय स्थिति को दर्शाते हैं।

नेपाल और सिक्किम में भी महसूस हुए झटके

इसी बीच दक्षिण एशिया में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गईं। नेपाल में 23 मार्च को 4.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र बाझंग के रायल क्षेत्र के पास था। वहीं भारत के सिक्किम में 22 मार्च को 4.1 तीव्रता का हल्का भूकंप महसूस किया गया, जिसका केंद्र मंगन जिले में 14 किलोमीटर की गहराई पर था।

क्षेत्र क्यों है संवेदनशील?

टोंगा और आसपास का क्षेत्र प्रशांत ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है, जो दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से यहां बार-बार भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं।

निष्कर्ष

टोंगा में आया यह शक्तिशाली भूकंप भले ही गहराई के कारण बड़े नुकसान से बच गया हो, लेकिन इसने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर किया है। लगातार आ रहे झटके संकेत देते हैं कि आने वाले समय में सतर्कता और आपदा प्रबंधन की तैयारियां और मजबूत करने की आवश्यकता है।


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