दमिश्क, एजेंसी | वेब वार्ता
सीरियाई सेना अलेप्पो के पूर्वी इलाकों में दाखिल हुई: सीरिया में हालात एक बार फिर बदलते दिख रहे हैं। कुर्द नेतृत्व वाली सेनाओं के पीछे हटने के बाद अब सीरियाई सरकारी सेना ने अलेप्पो के पूर्वी इलाकों में प्रवेश कर लिया है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डेर हाफ़र शहर पर पूर्ण नियंत्रण की घोषणा की है।
सरकारी टेलीविज़न पर सेना की ओर से शनिवार को यह घोषणा की गई कि उन्होंने “पूर्ण सैन्य नियंत्रण” स्थापित कर लिया है। इस बीच, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने पुष्टि की है कि सेना के जवान शहर के भीतर तैनात हो चुके हैं और जर्राह एयरबेस भी सेना के कब्जे में आ चुका है।
🇸🇾❌🇸🇾 – Parades through Aleppo after the successful capture of the Sheikh Maqsoud and Ashrafiyah neighbourhoods.
➡️ This is significant to the Syrian Army, as it means Aleppo has finally been secured since Assad’s fall, and SDF threats are no longer active in the region. pic.twitter.com/MdQAwTPWCM
— Syria Retold Daily (@SyriaRetold) January 11, 2026
एसडीएफ की वापसी और बदलता समीकरण
यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब अमेरिका समर्थित सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ (SDF) ने क्षेत्र से हटने पर सहमति जताई थी। शुक्रवार की रात, एसडीएफ के कमांडर मजलूम आब्दी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर घोषणा की कि उनका संगठन उत्तरी सीरिया के विवादित इलाकों से पीछे हटेगा। उन्होंने बताया कि एसडीएफ की सेनाएं शनिवार सुबह 7 बजे से यूफ्रेट्स नदी के पूर्वी किनारे की ओर बढ़ना शुरू करेंगी।
सूत्रों के अनुसार, कुर्द सेनाओं के हटने के साथ ही सीरियाई सेना ने डेर हाफ़र और इसके आसपास के कई इलाकों में तेज़ी से कब्ज़ा बढ़ाया। सरकारी बल अब मस्काना शहर की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे रणनीतिक दृष्टि से अलेप्पो और रक्का के बीच एक अहम मार्ग माना जाता है।
स्थानीय लोगों का पलायन और मानवीय संकट
सीरियाई अधिकारियों ने बताया कि पिछले 48 घंटों में दीर हाफ़र और मस्काना से हजारों नागरिक पलायन कर चुके हैं। यह पलायन इसलिए हुआ क्योंकि क्षेत्र में सीरियाई सेना और एसडीएफ के बीच भारी झड़पें हुई थीं। हालांकि अब इलाके में सापेक्ष शांति है, लेकिन मानवीय संगठनों का कहना है कि हजारों परिवार विस्थापन की स्थिति में हैं।
कुर्द-सरकारी संघर्ष की जड़ें क्या हैं?
सीरियाई सेना और कुर्द नेतृत्व वाली सेनाओं के बीच तनाव नया नहीं है। मार्च 2025 में दोनों पक्षों के बीच एक साझा सैन्य समझौते पर बातचीत रुकी थी। यह समझौता केंद्र सरकार को देश के उत्तर-पूर्वी इलाकों — जिनमें तेल क्षेत्र और सीमा चौकियां शामिल हैं — पर नियंत्रण देने से संबंधित था।
यह वही क्षेत्र है जहाँ इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ लड़ाई में एसडीएफ को अमेरिका का प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त था। लेकिन अब अहमद अल-शरा की अंतरिम सरकार ने एसडीएफ पर आरोप लगाया है कि वे अपने रैंकों में अल-असद समर्थक लड़ाकों और प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) के सदस्यों को जगह दे रहे हैं।
दूसरी ओर, कुर्द नेताओं का आरोप है कि दमिश्क प्रशासन उनके स्वायत्तता अधिकारों की गारंटी नहीं दे रहा है। वे यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि राजनीतिक संतुलन नहीं बना, तो “इस्लामिक स्टेट” जैसे संगठनों का पुनरुत्थान फिर संभव हो सकता है।
विश्लेषण: सीरिया में सत्ता का नया संतुलन
जानकारों का मानना है कि डेर हाफ़र और जर्राह एयरबेस पर कब्जा दमिश्क सरकार के लिए सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी जीत है। इससे सीरियाई सेना को अलेप्पो के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों पर दोबारा नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। यह कदम कुर्द स्वायत्त प्रशासन पर भी दबाव बढ़ाएगा, जो पहले से अमेरिकी समर्थन में कमजोर स्थिति में हैं।
वहीं, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह विकास तुर्की और रूस की भूमिका को और जटिल बना सकता है, क्योंकि दोनों देश सीरिया में कुर्द प्रभाव को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं।
निष्कर्ष
अलेप्पो के पूर्वी हिस्से पर सीरियाई सेना का नियंत्रण युद्धग्रस्त देश में बदलते समीकरणों का प्रतीक है। हालांकि इस नियंत्रण से फिलहाल क्षेत्र में स्थिरता आई है, लेकिन राजनीतिक समाधान के बिना यह स्थायित्व लंबे समय तक टिकेगा, ऐसा कहना मुश्किल है। फिलहाल, दुनिया की निगाहें दमिश्क, कुर्द प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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